
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। बाघ, तेंदुए सहित कई दुर्लभ वन्यप्राणियों तथा अनूठी प्राकृतिक छटा के लिए विश्वभर में पहचाने जाने वाले कान्हा टाइगर रिजर्व (केटीआर) में पर्यटकों को अब जंगली भैंसों का भी दीदार करने का मौका मिलेगा। मध्य प्रदेश सरकार ने वनभैंसों की पुनर्स्थापना की योजना बनाई है। इसके तहत आज मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए जा रहे चार वन भैंसों (एशियाई जंगली जल भैंस) का कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार रेंज के बड़े बाड़े में पुनर्स्थापन करेंगे।
जंगली भैंसा का यह पुनर्स्थापन जंगल की जैव विविधता सहित आनुवांशिक विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पर्यावरणविद् और वन्यजीव प्रेमी अभय कोचर ने बताया कि मध्य प्रदेश में वर्ष 1979 से पहले तक जंगली भैंसों की अच्छी-खासी संख्या थी। बालाघाट में भी ये वन्यप्राणी थे, लेकिन ये विलुप्त हो गए। चूंकि, वनभैंसा दलदली क्षेत्र में रहना पसंद करते हैं, इसलिए मध्य प्रदेश में इसके लिए कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को उचित माना गया है, क्योंकि यहां बड़ा क्षेत्र दलदली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सूपखार रेंज में 150 हेक्टेयर क्षेत्रफल (लगभग 370 एकड़) में फैले बाड़े में दो हजार किमी का सफर तय कर आ रहे इन वन भैंसों को छोड़ेंगे।
केटीआर प्रबंधन भैंसों की लगभग एक साल तक निगरानी करेगा। इसके बाद इन भैंसों को खुले में छोड़ा जाएगा, जिसका पर्यटक दीदार कर सकेंगे। अभय कोचर ने बताया कि पहले चरण में चार वनभैंसों को कान्हा में छोड़ा जाएगा। इसके बाद अगले पांच वर्षों तक दस-दस यानी कुल 50 वनभैंसों को काजीरंगा नेशनल पार्क से लाकर कान्हा में छोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार सुबह आठ बजे गढ़ी अंतर्गत सूपखार रेंज पहुंचेंगे। इस मौके पर जिले के प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह भी मौजूद रहेंगे।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए चार जंगली भैंसों में तीन मादा और एक नर जंगली भैंसा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के सहयोग से मध्य प्रदेश वन विभाग की ओर से संरक्षण की दिशा में यह ऐतिहासिक पहल की गई है। पांच सालों में लगभग 50 वनभैंसों (बुबालस आर्नी) को पुनर्स्थापित करने की योजना है। इसके तहत आठ वनभैंसे मानसून से पहले यहां पहुंचने वाले हैं।
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असम के काजीरंगा के मध्य और पूर्वी क्षेत्रों से सात किशोर भैंसों को पकड़ा गया था। क्वारंटाइन प्रोटोकॉल पूरा करने के लिए पकड़े गए जंगली जल भैंसों को एक हेक्टेयर के विशेष बाड़े में रखा गया। क्वारंटाइन प्रोटोकॉल पूर्ण होने के बाद जंगली भैंसों का स्थानांतरण 25 अप्रैल को चार जंगली भैंसों ने काजीरंगा से कान्हा टाइगर रिज़र्व तक की अपनी दो हजार किलोमीटर की यात्रा शुरू की है। 28 अप्रैल को ये भैंसे कान्हा टाइगर रिज़र्व पहुचेंगे, जिन्हें मुख्यमंत्री सूपखार रेंज के बाड़े में सॉफ्ट रिलीज करेंगे।