
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। महज चार महीने का बालक हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। उसके हृदय में छिद्र है। आठ मई को डीईआईसी में आयोजित शिविर में मुंबई के चिकित्सकों ने जांच के बाद तत्काल सर्जरी की जरूरत बताई थी।
जिला अस्पताल के पीआईसीयू में दो दिनों तक चले उपचार के बाद बालक की हालत स्थिर होते ही गुरुवार सुबह महाराष्ट्र के बिरसी एयरपोर्ट से उसे मुंबई के लिए एयरलिफ्ट किया गया।

कलेक्टर मृणाल मीना के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. परेश उपलप के नेतृत्व में मुंबई भेजने की तैयारी की गई।
बालक के साथ उसके पिता और मां भी हैं। गुरुवार सुबह लगभग आठ बजे एंबुलेंस से बिरसी एयरपोर्ट लाया गया है। 10 बजे पीएमश्री एयर एंबुलेंस योजना के तहत प्लेन उपलब्ध कराया गया है।
इस दौरान सीएमएचओ डा. उपलप, डीईआईसी प्रबंधक राजाराम चक्रवर्ती सहित मेडिकल स्टाफ मौजूद रहा। माता-पिता के साथ डाक्टरों की टीम भी प्लेन से मुंबई के लिए रवाना हुई है।
सीएमएचओ डा. उपलप ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत दो मई को बैहर तथा आठ मई को बालाघाट जिला अस्पताल में विशेष हृदय रोग शिविर का आयोजन किया गया था। दोनों शिविरों में कुल 34 बच्चे हृदय संबंधी गंभीर बीमारी से ग्रसित पाए गए। इन्हें सर्जरी की तत्काल जरूरत बताई गई।
इस आधार पर 15 बच्चों की निश्शुल्क सर्जरी जबलपुर में हो चुकी है। जबकि तीन बच्चे पूर्व में ही मुंबई के नारायण हृदयालय में भर्ती हैं। अब बालक को भी मुंबई के इसी अस्पताल में भर्ती किया जाएगा, जहां सभी चारों बच्चों की हार्ट सर्जरी होगी। डा. उपलप ने बताया कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि सभी सर्जरी सफल होगी और बच्चों को नई जिंदगी मिलेगी।
गुरुवार को एयरलिफ्ट करने के दौरान उसके माता-पिता भावुक नजर आए। उनके आंखें नम थीं। जन्म के बाद से माता-पिता उसकी हृदय संबंधी बीमारी से चिंतित हैं, लेकिन सरकार की योजना के तहत मुंबई के बड़े अस्पताल में निश्शुल्क उपचार होगा। परिजनों ने मप्र शासन और जिला प्रशासन का आभार प्रकट किया है।
पिता ने बताया कि हमने कल्पना भी नहीं की थी कि हमारे बेटे के लिए ऐसी व्यवस्था होगी। एयरलिफ्ट के दौरान सीएमएचओ ने अपनी गोद में संभाला। एयर एंबुलेंस में बैठते ही माता-पिता रो पड़े। सीएमएचओ ने उन्हें हिम्मत दी और हर संभव मदद का भरोसा दिया। बता दें कि पिता मजदूरी करते हैं और मां गृहणी हैं।