
गुनेश्वर सहारे, नईदुनिया बालाघाट। दक्षिण वन मंडल बालाघाट सामान्य के वन परिक्षेत्र में आने वाले जंगलों में मई माह से तेंदूपत्ता तुड़ाई का कार्य प्रारंभ हो गया है। तेंदूपत्ता संग्राहक इस बार ‘मानव मुखौटे’(चेहरा) लगाकर जंगल में जा रहे है। जंगल में मानव के लिए सबसे बड़ा खतरा बाघ होता है।
दरअसल, वन्य प्राणी विशेषकर, बाघ डरते है और यह तकनीक मनुष्यों के बचाव में कारगर साबित होती है। बाघ अधिकांश तौर पर पीछे से हमला करते हैं। ऐसे में जब लोग अपने सिर के पीछे मानव चेहरा पहनते हैं, तो बाघ असमंजस में पड़ जाते है कि वे सामने से देख रहे हैं।
यह मानव-बाघ द्वंद्व रोकने के आसान उपाय है। मानव मुखौटे लगाने से बाघ समझता है कि उन्हें कोई देख रहा है, चेहरे को देखकर सतर्क हो जाते है या दूर रहते है। यह तकनीक कुछ हद तक बाघों को दूर करने से रोकती है।
दक्षिण वन मंडल बालाघाट सामान्य में दस वन परिक्षेत्र में लालबर्रा, वारासिवनी, खैरलांजी, कटंगी, बालाघाट, लौंगुर, हट्टा, किरनापुर, पूर्व लांजी सामान्य व पश्चिम लांजी सामान्य आते है। इनमें से लालबर्रा, वारासिवनी, कटंगी के जंगलों में बाघ अधिक पाए जाते है। ये जंगल कान्हा कारिडोर, सिवनी पेंच व महाराष्ट्र के घने जंगल से लगे है।
बाघों के मूवमेंट वाले क्षेत्र में वन विभाग ने 6000 मानव मुखौटे तेंदूपत्ता तोड़ने वालों को बांटे हैं। इसके साथ ही जंगल जाने वाले लोगों को जरूरी दिशा निर्देश भी दिए है। जंगल में तेंदूपत्ता तुड़ाई करने जाने वाले लोगों को समूह में जाने कहा जा रहा है।जिससे सभी परिक्षेत्र में संग्राहक एक साथ जाते है।
वन विभाग ने तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए बच्चों और बुजुर्गों को जंगल नहीं जाने की सलाह दी है, बाघ अधिकांश तौर पर कमजोर लोगों पर ही हमला करता है। इसलिए वनकर्मियों का दल सुबह जंगल के समीप पहुंचकर तेंदूपत्ता तुड़ाई करने जाने वालों पर निगरानी बनाए रखते हैं।
संवेदनशील इलाकों में तेंदूपत्ता तुड़ाई करने वालों को मानव मुखौटे पहनकर तेंदूपत्ता तोड़ने के निर्देश दिए गए है। तेंदूपत्ता तुड़ाई करते समय यदि बाघ आ गया, तो पत्ता तोड़ने वाला सिर के पीछे मुखौटा लगाए रखता है। इससे बाघ समझेगा कि मानव उसके तरफ देख रहा है। जिससे बाघ एकाएक हमला नहीं करेगा और आगे बढ़ जाएगा। मानव मुखौटे तेंदूपत्ता तुड़ाई करने वालों को लगाने का नवाचार डीएफओ सर ने खोज निकाला है, जिसका पालन किया जा रहा है।
छत्रपाल सिंह जादौन, वन परिक्षेत्र अधिकारी, वारासिवनी।
वन परिक्षेत्र में जितने भी तेंदूपत्ता संग्राहक है। जंगल में तेंदूपत्ता तुड़ाई करने जाते है, तो मानव मुखौटे लगाकर जा रहे है। विभाग की तरफ से संग्राहकों को मुखौटे दिए गए है। इन सभी को जंगल अंधेरे में न जाने की सलाह दी गई है। साथ ही वन विभाग के दिशा निर्देश का पालन करने कहा गया है। तेंदूपत्ता तोड़ने वाले लोगों के लिए मानव मुखौटे लगाने का नवाचार डीएफओ सर का है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में जंगल पर वन अमले की हर समय निगरानी बनी रहती है।
सीता भलावी, वन परिक्षेत्र अधिकारी, लालबर्रा।
तेंदूपत्ता तोड़ने के दौरान मानव मुखौटा लगाना बेहतर माध्यम हैं। इस बीच बाघ सामने आता है, तो उसे लगता है कि मानव मेरे तरफ निरंतर नजर बनाए हुए है। जिसकी वजह से एकाएक वह हमला नहीं कर सकता। ऐसे में मानव की जान बच जाती है और बाघ भी मन बदल कर दूसरी ओर निकल जाता है।
डा. आशीष वैद्य, पशु चिकित्सक एवं वन्य प्राणी विशेषज्ञ।