मध्य प्रदेश में वनभैंसों की वापसी; असम से लाए चार वनभैंसों को सीएम ने कान्हा में किया 'सॉफ्ट रिलीज'
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में असम के कांजीरंगा से लाए गए चार वनभैंसों को 150 हेक्टेयर के बाड़े में 'सॉफ्ट रिलीज' किया। ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 28 Apr 2026 12:10:09 PM (IST)Updated Date: Tue, 28 Apr 2026 12:16:55 PM (IST)
सीएम डॉ. मोहन यादव ने जंगली भैसों को किया सॉफ्ट रिलीज।HighLights
- कांजीरंगा से लाए गए चार भैंसों में तीन मादा और एक नर है, पिंजरे से बाड़े में छोड़ना ऐतिहासिक पल रहा
- 1979 से पहले बालाघाट समेत मध्य प्रदेश में अच्छी संख्या थी, लेकिन बाद में ये विलुप्त हो गए थे
- हर साल 10-10 भैंसे लाकर कान्हा में छोड़े जाएंगे, आनुवांशिक विविधता के लिए यह बहुत अहम है
नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। चीता प्रोजेक्ट की सफलता के बाद मप्र सरकार ने अब मप्र में वनभैंसा को पुनर्स्थापित किया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव कान्हा राष्ट्रीय उद्यान पहुंचे, जहां उन्होंने 2000 किमी दूर असम के कांजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए चार वनभैंसा को साफ्ट रिलीज किया।
पिंजरे में बंद भैसों का 150 हेक्टेयर के बाड़े में आना मप्र में वन्यप्राणी संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक पल रहा। इस दौरान सांसद भारती पारधी, बैहर सीट से पूर्व भाजपा विधायक भगत सिंह नेताम, कान्हा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर माणिकमणि त्रिपाठी सहित कान्हा प्रबंधन तथा वन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
अगले पांच साल में 50 वनभैंसे लाने का लक्ष्य
कांजीरंगा नेशनल पार्क से लाए जा रहे चारों वन भैंसा का यह पुनर्स्थापन जंगल की जैव विविधता सहित आनुवांशिक विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में वर्ष 1979 से पहले तक जंगली भैंसों की अच्छी-खासी संख्या थी। बालाघाट में भी ये वन्यप्राणी थे, लेकिन ये समय के साथ विलुप्त हो गए।
चूंकि, वनभैंसा दलदली क्षेत्र में रहना पसंद करते हैं, इसलिए मध्य प्रदेश में इसके लिए कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को उचित माना गया है, क्योंकि यहां बड़ा क्षेत्र दलदली है। केटीआर प्रबंधन भैंसों की लगभग एक साल तक निगरानी करेगा। इसके बाद इन भैंसों का खुले में छोड़ा जाएगा, जिसका पर्यटक दीदार कर सकेंगे।