
नईदुनिया प्रतिनिधि, बड़वानी। लोकायुक्त इंदौर के दल ने गुरुवार को जिले के राजपुर में बड़ी ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया। इस दौरान राजपुर के एक पैथालाजी लैब संचालक से जांच की एवज में 50 प्रतिशत तक रिश्वत की मांग करते हुए हजारों रुपये रिश्वत लेते दो मेडिकल ऑफिसर सहित एक संविदा डाॅक्टर को रंगे हाथों पकड़ा। लोकायुक्त प्रकरण की इस कार्रवाई से जिले में एक बार फिर सिस्टम में भ्रष्टाचार की जड़ें खुलकर सामने आई।
लोकायुक्त से प्राप्त जानकारी के अनुसार आवेदक राजपुर निवासी अदनान अली पुत्र फरहत अली सेवा पैथोलाजी लैब के मैंनेजर ने लोकायुक्त को शिकायत दर्ज कराई थी कि राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल ऑफिसर अमित शाक्य, दिव्या सांई और संविदा चिकित्सा अधिकारी मनोहर गोदारा द्वारा जांच के लिए आवेदक की लैब पर भेजने के एवज में लैब में प्राप्त राशि की 20 प्रतिशत राशि कमीशन बतौर ली जा रही थी। यह प्रक्रिया बीते कई माह से चल रही थी और कमीशन की राशि उक्त तीनों आरोपित द्वारा आपस में मिलीभगत कर एकमत और एकराय होकर बांटी जा रही थी।
उक्त कमीशन की राशि 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी थी। इसके तहत गत माह में आवेदक की लैब में प्राप्त मरीजों की जांच की राशि की 50 प्रतिशत राशि शाक्य द्वारा 18 हजार रुपये, सांई द्वारा आठ हजार रुपये और डा. गोदारा द्वारा 21 हजार 800 रुपये कमिशन की राशि बतौर रिश्वत के रुप में मांगी जा रही थी। इसको लेकर आवेदक ने 4 मई को लोकायुक्त इंदौर एसपी राजेश सहाय को की थी। लोकायुक्त की जांच में सत्यापन में शिकायत सही पाई गई और आरोपित कुछ कम राशि लेने पर सहमत थे।
लोकायुक्त पुलिस ने आवेदक की शिकायत का सत्यापन कर टै्रप का गठन कर कार्रवाई की योजना बनाई। इस दौरान आरोपित शाक्य को आवेदक से 8 हजार रुपये, आरोपित साईं को आवेदक से 5 हजार रुपये और आरोपित डॉक्टर गोदारा को आवेदक से 12 हजार रुपये रिश्वत राशि लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा।
तीनों आरोपितों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है। बता दें कि जिले में रिश्वत मांगने के भ्रष्ट्राचार को लेकर गत मार्च-अप्रैल माह में भी प्रकरण सामने आए हैं।
उक्त ट्रैप दल में डीएसपी सुनील तालान, कार्यवाहक निरीक्षक रेनू अग्रवाल, कार्यवाहक प्रधान आरक्षक प्रमोद यादव, विवेक मिश्रा, आरक्षक चंद्रमोहन बिष्ट, रामेश्वर निंगवाल, कमलेश परिहार, आशीष नायडू, श्रीकृष्णा अहिरवार, शेरसिंह, प्रभात मोरे, महिला आरक्षक जाह्नवी सेंगर, जानू वास्केल शामिल थे।
केस-1 : 6 अप्रैल को जिले के राजपुर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के लेखा शाखा प्रभारी को लोकायुक्त पुलिस ने 7 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपित द्वारा आवेदक की बहू की अनुकंपा नियुक्ति पत्र दिलाने और वेतन निकालने की एवज में रुपये की मांग की थी। आवेदक की शिकायत की पुष्टि उपरांत लोकायुक्त दल ने राजपुर के बीईओ कार्यालय में लेखा शाखा प्रभारी के रुप में पदस्थ 36 वर्षीय प्रदीप मंडलोई पिता भारतसिंह मंडलोई को रिश्वत लेते हुए ट्रेप किया।
केस-2 : 18 मार्च को ही लोकायुक्त दल ने निवाली बीआरसी को 5 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। वहीं इस मामले में विभाग के उपयंत्री को भी आरोपी बनाया गया था। आरोपियों द्वारा प्राथमिक विद्यालय के प्रधान अध्यापक से बालिका शौचालय की रिपेयरिंग के बाद पूर्णता प्रमाण पत्र के नाम पर यह राशि मांगी थी।
केस-3 : 9 मार्च को जिले के अंजड़ में पुलिस उपनिरीक्षक और आरक्षक को रिश्वत की मांग करने के सत्यापित ऑडियो रिकार्डिंग के आधार कार्रवाई की थी। इस मामले में आरोपियों ने अंजड़ के ही एक ज्वेलरी संचालक को पुराने केस में फंसाने का दबाव बनाकर उससे बचाने के लिए 50 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी। जिसके बाद लोकायुक्त दल ने आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया था।