'गीली मिट्टी जैसे होते हैं जनजाति समुदाय के लोग...'- राष्ट्रपति मुर्मु ने दिलाया संकल्प, 2047 तक बनाना है विकसित भारत
बैतूल में आदिवासी समाज सशक्तीकरण महासम्मेलन में राष्ट्रपति ने आदिवासी युवाओं को आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल सशक्तीकरण से जोड़ने पर जोर दिया।
Publish Date: Thu, 18 Jun 2026 02:04:09 PM (IST)Updated Date: Thu, 18 Jun 2026 02:21:25 PM (IST)
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बैतूल में ब्रह्मकुमारी द्वारा आयोजित आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तीकरण महासम्मेलन में शामिल हुईं। नईदुनिया।HighLights
- राष्ट्रपति ने आदिवासी युवाओं को आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल सशक्तीकरण से जोड़ने पर जोर दिया
- प्राकृतिक खेती को स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए आवश्यक बताते हुए इसके विस्तार की बात कही
- वर्ष 2047 तक आध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण आधारित विकसित भारत के निर्माण का आह्वान किया
नईदुनिया प्रतिनिधि, बैतूल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि आदिवासी समाज के युवाओं को आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल सशक्तीकरण से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके साथ ही उनकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रपति ने यह बात बैतूल में ब्रह्मकुमारी संस्था द्वारा आयोजित ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तीकरण महासम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कही।
पंचतत्वों का सम्मान करता है आदिवासी समाज
उन्होंने कहा कि विकास और संस्कृति के बीच संतुलन ही किसी समाज की वास्तविक शक्ति है। जनजातीय समुदाय की जीवनशैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित होती है। आदिवासी समाज प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीता है और धरती, जल, वायु, आकाश, सूर्य एवं चंद्रमा जैसे पंचतत्वों का सम्मान करता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समाज प्रेम, शांति और सह-अस्तित्व की भावना के साथ जीवन जीना जानता है। बैतूल के आदिवासी समुदाय ने अपनी लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और पारंपरिक ज्ञान को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखा है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा है।
उन्होंने महासम्मेलन के माध्यम से वर्ष 2047 तक ऐसे विकसित भारत के निर्माण का संकल्प दिलाया, जहां आध्यात्म, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण समावेशी विकास की आधारशिला बनें। राष्ट्रपति ने कहा कि यह महासम्मेलन जनजातीय समाज को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में और अधिक सशक्त भागीदारी देने का कार्य करेगा।
प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की आवश्यकता
राष्ट्रपति ने प्राकृतिक खेती को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों और विदेशी पेस्टीसाइड के अत्यधिक उपयोग ने भूमि की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित किया है। अब देश प्राकृतिक खेती की ओर लौट रहा है, जो शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव और सर्वमंगलकारी सोच आदिवासी समाज की सबसे बड़ी ताकत है।
कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उइके, प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, ब्रह्मकुमारी संस्थान के उड़ीसा प्रभारी नथमल भाई, भोपाल जोन की क्षेत्रीय निदेशक शैलजा दीदी और बैतूल प्रभारी मंजू दीदी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।