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लोकार्पण के 3 महीने बाद भी ताले में 'कैद' विश्रामालय, 85 लाख का भवन तैयार, पर फर्श पर रात काटने को मजबूर मरीज के परिजन

मध्य प्रदेश के बैतुल जिले के जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के स्वजन को रात में ठहरने की सुविधा देने के उद्देश्य से करीब 84.98 लाख रुपए ...और पढ़ें

By Vinay VermaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 04:10:38 PM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 04:10:38 PM (IST)
लोकार्पण के 3 महीने बाद भी ताले में 'कैद' विश्रामालय, 85 लाख का भवन तैयार, पर फर्श पर रात काटने को मजबूर मरीज के परिजन
फोटो- जिला अस्पताल का विश्रामालय लोकार्पण के तीन महीने बाद भी बंद पड़ा है।

HighLights

  1. 84.98 लाख खर्च कर तैयार भवन में लोकार्पण के बाद भी ताला बंद है
  2. 30 बिस्तर का विश्रामालय तैयार, फिर भी मरीजों के स्वजन को फर्श का सहारा
  3. गांवों से आने वाले परिवारों को सबसे बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है

नईदुनिया प्रतिनिधि, बैतूल। जिला अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के स्वजन को रात में ठहरने की सुविधा देने के उद्देश्य से करीब 84.98 लाख रुपए की लागत से तैयार किया गया 30 बिस्तरों का विश्रामालय अब तक शुरू नहीं हो पाया है। भवन का मई में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में लोकार्पण हो चुका है, लेकिन करीब तीन महीने बाद भी इसके मुख्य द्वार पर ताला लगा हुआ है। एक ओर अस्पताल में दूरदराज से आने वाले मरीजों के स्वजन ठहरने के लिए परेशान होते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके लिए तैयार किया गया भवन उपयोग में नहीं आ रहा है। इससे सरकारी योजना की कार्यप्रणाली और सुविधा शुरू करने की तैयारियों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मई माह में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल, केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके सहित जिले के अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में विश्रामालय का लोकार्पण किया गया था। उस समय इसे जिला अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके स्वजन के लिए उपयोगी सुविधा बताया गया था। लेकिन लोकार्पण के बाद भी भवन में ठहरने की सुविधा शुरू नहीं हो सकी। करीब तीन महीने का समय बीतने के बावजूद अस्पताल आने वाले लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।


मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि विश्रामालय के संचालन की प्रक्रिया अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। इसे कौन संचालित करेगा, जिम्मेदारी किस संस्था या अधिकारी की होगी और मरीजों के स्वजन को यहां ठहराने के लिए क्या नियम होंगे, इन बिंदुओं पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

गांवों से आने वाले परिवारों की सबसे बड़ी परेशानी

जिला अस्पताल में जिले के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। कई बार मरीजों को एक से अधिक दिन अस्पताल में रहना पड़ता है और उनके साथ आए स्वजन के सामने रात में ठहरने की समस्या खड़ी हो जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निजी होटल या लाज में कमरा लेना आसान नहीं होता। ऐसे में कई लोग अस्पताल परिसर के बरामदों या फर्श पर ही रात बिताने को मजबूर हो जाते हैं।

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नगर के जागरूक लोगों का कहना है कि जब भवन तैयार था तो संचालन की रूपरेखा पहले क्यों नहीं बनाई गई। लोकार्पण से पहले जिम्मेदारी और नियम तय क्यों नहीं किए गए। तीन महीने बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है। जरूरतमंद स्वजन बाहर परेशान हो रहे हैं तो तैयार भवन को तत्काल शुरू करने में बाधा क्या है। जिला अस्पताल के आरएमओ डा रानू वर्मा ने बताया कि विश्रामालय के संचालन को लेकर अभी स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। इस संबंध में कलेक्टर से मार्गदर्शन मांगा गया है।