
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिंड: संबल योजना और कर्मकार मंडल में हुए करीब तीन करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सिटी कोतवाली पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस प्रकरण में अब तक कुल छह आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि मामले की विवेचना जारी है।
नगर पालिका भिंड में संबल योजना में हुए भ्रष्टाचार की जांच की जा रही है। विवेचना के दौरान सामने आया कि आरोपितों ने पहले से गिरफ्तार मुख्य आरोपित के साथ मिलकर हितग्राहियों की जगह अपने और अपने स्वजन के बैंक खाते लगाकर योजना की राशि हड़प ली।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि तीनों आरोपितों ने अपने और स्वजन के खातों में करीब 56 लाख रुपये ट्रांसफर कराए। इनमें से 17 लाख रुपये मुख्य आरोपित को दिए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि शेष राशि आरोपियों ने स्वयं उपयोग कर ली।
पुलिस ने इस मामले में 30 वर्षीय जितेंद्र पुत्र आज्ञाराम वर्मा निवासी गांधीनगर भिंड, 59 वर्षीय संतोष पुत्र राम सहाय शाक्य और 47 वर्षीय मंजू पत्नी पुजारी लाल अर्गल निवासी दर्पण कॉलोनी को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपितों के कब्जे से एक प्लॉट की रजिस्ट्री भी जब्त की है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित जितेंद्र वर्मा एमपी ऑनलाइन सेंटर संचालित करता था, जहां से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जाने की जानकारी मिली है। इस कार्रवाई में नगर पुलिस अधीक्षक निरंजन सिंह राजपूत, प्रधान आरक्षक मनीष सिंह, मनीष सिंह भदौरिया, रामकुमार शर्मा, राकेश तोमर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
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जांच में यह भी सामने आया है कि नगर पालिका भिंड में कर्मकार मंडल एवं संबल योजना के तहत हितग्राहियों के आवेदन लेकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए और बैंकों में फर्जी खाते खुलवाकर योजना की राशि निकाली गई।
वर्ष 2021 से 2024 के बीच नगर पालिका में पदस्थ एक क्लर्क, दो पूर्व सीएमओ सहित छह कर्मचारियों पर करीब 3 करोड़ 4 लाख रुपये के गबन का आरोप है। पुलिस ने कुछ माह पूर्व विदिशा से नगर पालिका के तत्कालीन क्लर्क राजेंद्र सिंह चौहान को भी गिरफ्तार किया था। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है।