
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिंड। पटवारी चयन परीक्षा 2008 से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी एंड साइंस रायपुर से जारी डीसीए/पीजीडीसीए प्रमाणपत्रों की जांच में इन्हें कूटरचित (फर्जी) पाए जाने के बाद पुलिस ने 6 आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई नगर पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई।
पुलिस के अनुसार उच्च न्यायालय ग्वालियर के निर्देश पर इन प्रमाण-पत्रों की सत्यता की जांच कराई गई थी। जांच में सामने आया कि आरोपित पंकज कुमार यादव पुत्र सहवीर यादव निवासी मातादीन का पुरा, रंजीत सिंह तोमर पुत्र दिनेश सिंह तोमर निवासी अग्रवाल कॉलोनी अटेर रोड, वंदना सोनी पुत्री रामसेवक सोनी निवासी हाउसिंग कालोनी, पूनम मिश्रा पुत्री किशनलाल मिश्रा निवासी बरहद थाना मेहगांव, अशोक कुमार पुत्र मुलू निवासी नालीपुरा थाना देहात और अरुण कुमार मांझी पुत्र रामजीलाल मांझी निवासी रंजना नगर थाना देहात ने न तो संबंधित यूनिवर्सिटी में नियमित रूप से प्रवेश लिया, न ही कक्षाएं अटेंड कीं और न ही परीक्षा दी। इसके बावजूद उन्होंने फर्जी तरीके से डीसीए/पीजीडीसीए डिप्लोमा प्राप्त कर लिया।
जांच के दौरान आरोपियों के बयानों में कई विसंगतियां सामने आईं। किसी ने यूनिवर्सिटी भवन को दो मंजिला बताया तो किसी ने हाल की बात कही, जबकि वास्तविक जांच में तीन मंजिला भवन में प्रत्येक मंजिल पर 10 कमरे पाए गए। इससे स्पष्ट हुआ कि आरोपित कभी वहां पढ़ाई करने गए ही नहीं।
इसके अलावा, यूनिवर्सिटी से मांगे गए दस्तावेजों में भी गंभीर कमी पाई गई। प्रवेश फार्म, उपस्थिति रजिस्टर, फीस रसीद, परीक्षा केंद्र जैसी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
केवल आंशिक अंक तालिकाएं दी गईं, जो संदेह को और मजबूत करती हैं। एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि कई आरोपियों ने पहले अन्य संस्थानों के कंप्यूटर प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे, जो अमान्य पाए गए।
इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी एंड साइंस रायपुर के प्रमाणपत्र लगाए, जो अब जांच में फर्जी साबित हुए। जांच में यह भी सामने आया कि उक्त यूनिवर्सिटी यूजीसी से मान्यता प्राप्त नहीं थी।
छत्तीसगढ़ प्राइवेट यूनिवर्सिटी रेगुलेटरी कमीशन के दस्तावेजों में भी इसकी पुष्टि हुई है। सीएसपी की रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि आरोपितों ने पटवारी परीक्षा में चयन के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन से साठगांठ कर कूटरचित डिप्लोमा तैयार कराए।
इस आधार पर थाना देहात में आरोपियों के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
जांच में सभी प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। आरोपितों ने न तो पढ़ाई की और न परीक्षा दी, बल्कि साठगांठ कर डिप्लोमा हासिल किया। साक्ष्यों के आधार पर एफआइआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
निरंजन सिंह राजपूत, सीएसपी भिंड।