
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश सरकार ने अगले साल अप्रैल-मई में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। महापौर और अध्यक्ष पद के आरक्षण के लिए आयुक्त नगरीय विकास को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने आरक्षण कार्य के लिए विहित प्राधिकारी घोषित किया है। अन्य पिछड़ा वर्ग को चुनाव में 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। वहीं, महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित रहेंगे।
प्रदेश में 2022 में नगरीय निकाय के चुनाव हुए थे। वैसे ये 2019 में होने चाहिए थे लेकिन कांग्रेस सरकार के समय चुनाव नहीं हो पाए और सत्ता परिवर्तन के बाद कोरोना महामारी के कारण दो साल कोई चुनाव नहीं हुए। इसके बाद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण का मामला फंस गया। हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट मामला पहुंचा। बाद में 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ चुनाव कराए गए। चूंकि, अप्रैल-मई 2027 में चुनाव प्रस्तावित हैं, इसलिए सरकार ने आरक्षण की प्रक्रिया समय से पूरा करने के लिए अभी से विहित प्राधिकारी घोषित कर दिया है।
आरक्षण नियम के अनुसार तीन श्रेणियों में किया जाता है। इसमें महिला, अनारक्षित (सामान्य), अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ा वर्ग शामिल हैं। 16 नगर निगम में कौन सी सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित रहेगी, यह लाटरी से तय होगा। कुल सीटों में से 50 प्रतिशत महिलाओं के लिए अलग की जाएंगी। क्षेत्र की जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए सीट आरक्षित होगी और फिर चक्रानुक्रम से ओबीसी आरक्षण होगा। इसमें सबसे पहले उन क्षेत्रों को अलग किया जाएगा जो वर्तमान में ओबीसी के लिए आरक्षित हैं।
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उधर, राज्य निर्वाचन आयोग ने भी चुनाव की तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के आधार पर सूची तैयार होगी। इसके साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारियों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से जुड़ी जानकारियां भी मांगी गई हैं ताकि समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं कर ली जाएं।