
नवदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। जिले में सहकारिता की शिकायतों को लेकर विभाग गंभीर नहीं है, यही कारण है कि अब भी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर 285 शिकायतें लंबित बनी हुई हैं। सहकारिता संस्थाओं की गड़बड़ियों से परेशान होकर लेकर विभाग के कार्यालय में न्याय की गुहार लगाते हैं लेकिन सुनवाई नहीं होने से वह कार्यालयों के चक्कर लगाते रहते हैं। इतना ही नहीं आखिर वह न्याय की उम्मीद से कलेक्टर के पास भी पहुंच रहे हैं।
हालात यह है कि एक-एक आवेदक ने न्याय के लिए कई बार आवेदन दिए, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई है।ऐसे में अब इनकी समस्या का समाधान करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा योजना बनाई जा रही है, जिसके तहत इनकी एक ही जगह सुनवाई होगी और निराकरण भी कर दिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार जिले में एक दर्जन से अधिक ऐसी सहकारी संस्थाएं हैं जिनके विवाद लंबे समय से चले आ रहे हैं। इन संस्थाओं में अध्यक्ष व सदस्यों के द्वारा किए गए फर्जीवाड़े की वजह से सदस्य परेशान हैं। जिनकाे राशि जमा करने के बाद भी प्लाट नहीं मिला है और न ही उनके नाम रजिस्ट्री हुई है।
ऐसे में न्याय नहीं मिलने से परेशान सदस्य पुराना सचिवालय स्थित सहकारिता विभाग के कार्यालय पहुंच रहे हैं लेकिन वहां भी सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता है। यहां ऐसी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है, जिससे कि लोगों की समस्या का समाधान हो सके।
ऐसे में सदस्य एसडीएम, तहसील न्यायालय के साथ-साथ कलेक्टर के पास तक पहुंच रहे हैं लेकिन सहकारिता विभाग का मामला होने से वह भी वापस आवेदकों को वहीं भेज देते हैं।यही कारण है कि शिकायतें लंबित रहती हैं और लोग कार्यालयों के चक्कर लगाते रहते हैं। ऐसे ही मामले कलेक्टर के पास पहुंच रहे हैं, जिन्हें उन्होंने गंभीरता से लेते हुए सहकारिता विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा है।
लोग अपनी शिकायतों को लेकर कलेक्टर जनसुनवाई में बार-बार चक्कर लगा रहे हैं लेकिन निराकरण नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर सहकारिता की अब तक कुल 285 शिकायतें लंबित हैं, जबकि 50 दिन से करीब 244 शिकायतें लंबित हैं। वहीं अप्रैल में करीब 40 शिकायतें दर्ज हुईं थी, जिनमें से मात्र सात शिकायतों का ही संतुष्टि के साथ निराकरण किया जा सका है।
प्रीति सक्सेना, कन्हैयालाल बिजलानी,भूपेंद्र सिंह सहित अन्य ने शिकायत करते हुए बताया कि रोहित गृह निर्माण समिति संस्था में विकास शुल्क जमा करने के बाद भी 15 सालों से आवंटित प्लाट की रजिस्ट्री नहीं करवाई गई है।समिति में सहकारिता विभाग से प्रशासक नियुक्त हैं लेकिन किसी भी पीड़ित को न्याय नहीं मिला है।वह कलेक्टर जनसुनवाई, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, सहकारिता विभाग सहित अन्य कार्यालयों में शिकयतें कर चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं से संबंधित अनेक शिकायतें जनसुनवाई व अन्य माध्यम से मिल रही हैं।एक ही शिकायत अलग-अलग विभागों में दर्ज की जा रही है लेकिन हल नहीं निकल पा रहा है।ऐसे में जल्द ही समस्या का समाधान करने के लिए एक ही जगह सुनवाई की व्यवस्था की जाएगी, जिससे लंबित शिकायतों का समय पर समाधान किया जा सके।
प्रियंक मिश्रा, कलेक्टर