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आयुष्मान भारत योजना पर बड़ा अपडेट, 1 अक्टूबर से इंदौर-भोपाल समेत 4 बड़े शहरों के 289 अस्पताल हो सकते हैं इससे बाहर

मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ़्त इलाज कराने वाले मरीजों और निजी अस्पतालों के लिए बड़ी खबर है, जहां इंदौर-भोपाल समेत 4 बड़े शहरों के 2...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Fri, 04 Sep 2026 11:01:53 AM (IST)Updated Date: Fri, 04 Sep 2026 11:06:58 AM (IST)
आयुष्मान भारत योजना पर बड़ा अपडेट, 1 अक्टूबर से इंदौर-भोपाल समेत 4 बड़े शहरों के 289 अस्पताल हो सकते हैं इससे बाहर
MP में आयुष्मान योजना के नियम सख्त किए गए हैं (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. MP में आयुष्मान योजना के नियम सख्त किए गए हैं
  2. 1 अक्टूबर से 289 अस्पताल हो सकते हैं बाहर
  3. इससे भोपाल-इंदौर सहित बड़े शहरों में हड़कंप मचा

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ़्त इलाज कराने वाले मरीजों और निजी अस्पतालों के लिए बड़ी खबर है। 1 अक्टूबर से प्रदेश के चार प्रमुख मेट्रो शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में नियम कड़े होने जा रहे हैं।

एंट्री लेवल एनएबीएच (NABH) के आधार पर सूचीबद्ध अस्पतालों को दी गई 6 महीने की रियायत अवधि 30 सितंबर को समाप्त हो रही है। इसके बाद इन शहरों में आयुष्मान योजना से जुड़े रहने के लिए 'फुल एनएबीएच' (Full NABH) प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा। इस नए मानक को पूरा न करने पर चारों शहरों के 289 अस्पतालों की सम्बद्धता खत्म हो सकती है।


भोपाल में सबसे गंभीर असर

राजधानी भोपाल में इसका सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिल सकता है। भोपाल में कुल 163 NABH मान्यता प्राप्त अस्पताल पंजीकृत हैं। इनमें से केवल 24 अस्पतालों के पास ही फुल NABH की पात्रता है। बाकी 139 अस्पताल (लगभग 85%) अभी भी शुरुआती यानी 'एंट्री लेवल NABH' के भरोसे चल रहे हैं।

यदि ये 289 अस्पताल 30 सितंबर तक 'स्कोप ऑफ सर्विस' (Scope of Service) के तहत फुल NABH प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर पाते हैं, तो 1 अक्टूबर से इन्हें आयुष्मान भारत योजना की सूची से हटा दिया जाएगा।

यह भी पढ़ें- MP में आयुष्मान योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, 83 अस्पतालों पर कार्रवाई, 18 ब्लैकलिस्ट, 15 सस्पेंड और 50 पर करोड़ों का जुर्माना

नियमों में क्या बदलाव आया है?

जिस विशिष्ट इलाज (Speciality) के लिए अस्पताल को आयुष्मान की मान्यता मिली है, उसके अनुरूप उसे फुल NABH सर्टिफिकेट पेश करना अनिवार्य होगा। मेट्रो शहरों के अलावा राज्य के अन्य जिलों में अस्पतालों के लिए 'एंट्री लेवल NABH' की व्यवस्था जारी रहेगी।

हालांकि, इसके लिए जिला गुणवत्ता प्रत्यायन मूल्यांकन समिति (DQACC) में कम से कम 70 अंक का स्कोर लाना होगा। ट्राइबल क्षेत्रों में बिना NABH मान्यता के भी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज की सुविधा जारी रहेगी।