एम्स भोपाल का चमत्कार, महिला को दिलाई दर्द से परमानेंट मुक्ति, 6 महीने से 'पत्थर' जैसा हो गया था शरीर
एम्स भोपाल की टीम ने उत्तर प्रदेश के ललितपुर की एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला को छह महीने के असहनीय दर्द और स्पास्टिक पैराप्लेजिया (लकवे जैसी स्थिति) से ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 03 May 2026 01:56:14 PM (IST)Updated Date: Sun, 03 May 2026 02:01:54 PM (IST)
एम्स भोपाल में इंट्राथीकल बैक्लोफेन पंप तकनीक से बुजुर्ग महिला को मिला नया जीवनHighLights
- एम्स भोपाल में एक बार फिर से चमत्कार हुआ है
- महिला को असहनीय दर्द और लकवे से मिली मुक्ति
- तीन लाख रुपये तक सस्ता हुआ इलाज
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। एम्स भोपाल के दर्द चिकित्सा यूनिट (एनेस्थेसियोलॉजी विभाग) और न्यूरोसर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने उत्तर प्रदेश के ललितपुर की एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला को छह महीने के असहनीय दर्द और स्पास्टिक पैराप्लेजिया (लकवे जैसी स्थिति) से स्थायी छुटकारा दिलाया है। जानकारी के अनुसार, महिला रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट के कारण 'स्पास्टिक पैराप्लेजिया' का शिकार हो गई थीं।
इस बीमारी में मांसपेशियां इस कदर जकड़ जाती हैं कि मरीज का शरीर पत्थर की तरह सख्त हो जाता है और हिलना-डुलना भी असंभव हो जाता है। महीनों से भीषण दर्द के कारण महिला सो भी नहीं पा रही थीं। जब दवाओं की भारी खुराक भी बेअसर साबित हुई, तब परिजन उन्हें एम्स भोपाल लेकर आए। दर्द चिकित्सा विशेषज्ञ डा. अनुज जैन और न्यूरोसर्जन डा. सुमित राज की टीम ने महिला के शरीर में 'प्रोग्रामेबल ड्रग डिलीवरी पंप' प्लांट करने का निर्णय लिया।
कैसी काम करती है तकनीक?
इस तकनीक के तहत एक छोटा डिवाइस त्वचा के नीचे प्रत्यारोपित किया जाता है, जो सीधे रीढ़ की हड्डी के तरल (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लुइड) में दवा पहुंचाता है। इस विधि का सबसे बड़ा फायदा यह है कि दवा सीधे नसों तक पहुंचती है, जिससे परिणाम तुरंत और बेहद प्रभावी मिलते हैं। डा. अनुज जैन ने बताया कि यह जटिल प्रक्रिया देश के कुछ चुनिंदा संस्थानों में ही उपलब्ध है।
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इलाज के खर्चे में तीन लाख की कमी
निजी अस्पतालों में इस पंप और सर्जरी की कुल लागत 10 लाख रुपये से अधिक आती है, जबकि एम्स भोपाल में यह सफल उपचार लगभग सात लाख रुपये में संपन्न हुआ। सफल सर्जरी के बाद अब महिला जकड़न और दर्द से पूरी तरह मुक्त हैं और महीनों बाद उन्हें चैन की नींद आई है।