चूहों को मारने वाला जहर बन रहा जानलेवा, एम्स भोपाल ने बताया - समय पर इलाज से बच सकती है जान
घरों और खेतों में चूहों व कीड़ों को मारने के लिए इस्तेमाल होने वाला एल्युमिनियम फास्फाइड और जिंक फास्फाइड (अनाज में रखने वाली गोली) इंसान के लिए कितना ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 21 Mar 2026 09:37:39 PM (IST)Updated Date: Sat, 21 Mar 2026 09:37:38 PM (IST)
एम्स भोपाल ने बनाए अनाज में रखने वाली गोली के नुकसान। (एआई से जेनरेट किया गया इमेज)HighLights
- चूहों को मारने वाला जहर बन रहा जानलेवा।
- अनाज में रखी जाने वाली गोली के नुकसान।
- सही समय पर इलाज ही एकमात्र उपाय।
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। घरों और खेतों में चूहों व कीड़ों को मारने के लिए इस्तेमाल होने वाला एल्युमिनियम फास्फाइड और जिंक फास्फाइड (अनाज में रखने वाली गोली) इंसान के लिए कितना घातक हो सकता है, इसे लेकर एम्स भोपाल ने जागरूकता सत्र आयोजित किया।
विशेषज्ञों ने आगाह किया कि यह जहर शरीर में जाकर फास्फीन गैस छोड़ता है, जो अंगों को तेजी से नाकाम कर देती है। हालांकि, यदि मरीज को सही समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से उसकी जान बचाई जा सकती है।
अंगों पर हमले और लक्षणों की पहचान
एम्स भोपाल के औषध विज्ञान और मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों ने समझाया कि यह जहर शरीर के भीतर सूक्ष्म स्तर पर बदलाव करता है और हृदय व फेफड़ों पर सीधा हमला करता है।
डॉ. आयशा और डॉ. मेहजा ने बताया कि फास्फाइड जहर के लक्षणों को पहचानना और बिना देरी किए आघात एवं आपातकालीन विभाग पहुंचना सबसे जरूरी है। अस्पताल में नई उपचार पद्धतियों और बेहतर प्रबंधन के जरिए अब ऐसे गंभीर मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।
कानूनी महत्व और पोस्टमार्टम प्रक्रिया
सत्र में केवल इलाज ही नहीं, बल्कि इसके कानूनी महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। डॉ. एस. श्रीहरि और डॉ. बिस्वरूप ने बताया कि फास्फाइड से जुड़े मामलों में पुलिस जांच और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया कितनी महत्वपूर्ण होती है। वहीं, पैथोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. जय कुमार चौरसिया ने बताया कि जहर के कारण शरीर के ऊतकों में किस तरह के घातक बदलाव आते हैं। कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. डॉ. माधवानन्द कर ने कहा कि विष विज्ञान की यह जानकारी डॉक्टरों, रेजिडेंट्स और आम जनता के लिए जीवन रक्षक साबित होगी।
सत्र में शामिल विशेषज्ञ और छात्र
इस कार्यक्रम में डीन प्रो. रजनीश जोशी सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और सैकड़ों छात्र शामिल हुए। इस मौके पर डॉ. अर्नीत अरोड़ा, डॉ. बालकृष्णन एस, डॉ. विष्णु नारायण मिश्रा, डॉ. अतुल एस. केचे आदि मौजूद रहे।
फास्फाइड जहर के सेवन होने पर ये करें
- जहर के लक्षण दिखते ही नजदीकी बड़े अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जाएं।
- बिना डॉक्टरी सलाह के मरीज को जबरन कुछ खिलाने या उल्टी कराने की कोशिश घातक हो सकती है।
- डॉक्टर को स्पष्ट बताएं कि मरीज ने किस तरह का और कितनी मात्रा में जहर लिया है।
- फास्फाइड के मामले में शुरुआती एक घंटा जान बचाने के लिए सबसे कीमती होता है।