
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश सरकार ने राज्य की नई तबादला नीति 2026 जारी कर दी है। इसके साथ ही तबादलों पर लगा प्रतिबंध शिथिल हो गया है। एक जून से 15 जून तक तबादले हो सकेंगे। इससे पहले मुख्यमंत्री की ए प्लस नोटशीट वाले तबादले 31 मई तक किए जाएंगे। लंबित आवेदन निपटाए जाएंगे, इसे तबादला नीति में शामिल नहीं किया गया है। स्थानांतरण द्वारा रिक्त पदों की पूर्ति सबसे पहले अनुसूचित क्षेत्रों में की जाएगी। अनुसूचित क्षेत्रों में शत-प्रतिशत रिक्त पदों की पूर्ति होने के बाद ही गैर अनुसूचित क्षेत्रों में रिक्त पद स्थानांतरण द्वारा भरे जाएंगे।
अनुसूचित क्षेत्रों से गैर अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानांतरित शासकीय सेवकों को तब तक भारमुक्त नहीं किया जाएगा, जब तक कि उनके स्थान पर पदस्थ अधिकारी, कर्मचारी द्वारा पदभार ग्रहण न कर लिया गया हो। लेकिन यह शर्त एक अनुसूचित क्षेत्र से दूसरे अनुसूचित क्षेत्र में स्थानांतरित अधिकारियों, कर्मचारियों पर लागू नहीं होगी।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा तबादला नीति जारी करते समय एक गफलत भी हो गई। नीति में एक जून 2016 से 15 जून 2016 तक तबादला का उल्लेख कर दिया है। हालांकि इसके कुछ देर बाद ही इसमें सुधार कर एक जून 2026 से 15 जून 2026 पढ़ा जाने का एक संशोधित आदेश जारी कर दिया गया।
तबादले राज्य और जिला स्तर पर होंगे। पति-पत्नी (दंपती) की पदस्थापना एक स्थान पर रखी जाएगी। गंभीर बीमारी से पीड़ित शासकीय सेवकों को भी तबादले में रियायत दी जाएगी। मंत्री व प्रभारी मंत्रियों की अनुशंसा पर तबादले होंगे। मंत्री का अनुमोदन ई-ऑफिस के माध्यम से ही होगा। इतना ही नहीं विभाग अपनी सुविधा के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के अनुमोदन व मुख्यमंत्री की अनुशंसा से तबादला नीति बना सकेंगे।
स्वयं के व्यय वाले तबादलों में दो स्थितियां शामिल नहीं होंगी। इन्हें तबादला नीति से बाहर रखा गया है। पहला कि ऐसे शासकीय सेवक जो अति गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, लकवा, हृदयाघात से पीड़ित हैं और मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर स्थानांतरित किए जाते हैं उनका इस तबादला नीति में समावेश नहीं किया जाएगा।
वहीं पति-पत्नी व स्वयं बीमारी से पीड़ित शासकीय सेवक भी तबादला नीति की निर्धारित सीमा से बाहर रखा गया है। तबादला प्रतिबंध अवधि के दौरान केवल विभागीय मंत्री के प्रशासकीय अनुमोदन पर ही तबादले होंगे।
पद या संवर्ग की संख्या 200 तक है तो 20 प्रतिशत तबादले ही किए जाएंगे। वहीं 201 से 1000 संख्या तक 15 प्रतिशत, 1001 से 2000 तक 10 प्रतिशत और 2001 से अधिक होने पर पद या संवर्ग में कार्यरत संख्या के आधार पर स्थानांतरण किए जाएंगे। तबादले ई-ऑफिस के माध्यम से होंगे। इनमें स्वैच्छिक तबादले भी होंगे। यह नीति मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा एवं मध्य प्रदेश मंत्रालय पर लागू नहीं होगी।
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जिले के भीतर जिला संवर्ग/राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का जिला कलेक्टर द्वारा प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से तबादला किया जाएगा। गृह विभाग में उप पुलिस अधीक्षक के कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों, कर्मचारियों का स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड द्वारा और जिले के भीतर पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से होगा।
जिले के भीतर डिप्टी कलेक्टर/संयुक्त कलेक्टर अनुभाग परिवर्तन एवं तहसीलदार, नायब तहसीलदार की पदस्थापना प्रभारी मंत्री के परामर्श से की जाएगी। जिन अधिकारियों/कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय शेष हो, सामान्यतः उनका स्थानांतरण नहीं किया जाएगा।