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भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों पर वाटर कैनन के मामले ने पकड़ा तूल, उप मुख्यमंत्री ने दिए निष्पक्ष जांच के आदेश

भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर वाटर कैनन चलाने के मामले में जांच के आदेश हुए। डॉक्टर 30 हजार रुपये स्टाइपेंड पर अड़े हैं...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Tue, 08 Sep 2026 02:07:41 PM (IST)Updated Date: Tue, 08 Sep 2026 02:45:07 PM (IST)
भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों पर वाटर कैनन के मामले ने पकड़ा तूल, उप मुख्यमंत्री ने दिए निष्पक्ष जांच के आदेश
भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों पर वाटर कैनन के मामले ने पकड़ा तूल। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. इंटर्न डॉक्टरों पर वाटर कैनन चलाने के मामले में जांच होगी।
  2. डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने निष्पक्ष जांच के आदेश दिए।
  3. डॉक्टर वर्तमान 14,337 रुपये स्टाइपेंड को 30 हजार चाहते हैं।

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर पुलिस द्वारा वाटर कैनन के इस्तेमाल का मामला अब तूल पकड़ चुका है। घटना के बाद उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

दूसरी तरफ, इंटर्न डॉक्टर अपनी 30 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक मुख्यमंत्री की तरफ से कोई आधिकारिक लिखित आदेश जारी नहीं होता, उनका यह प्रदर्शन जारी रहेगा।

डिप्टी सीएम ने लिया संज्ञान, डीसीपी को सौंपी गई जांच

  • कार्यालय पुलिस आयुक्त, भोपाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 7 सितंबर को हमीदिया अस्पताल के गेट के पास डॉक्टरों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा वाटर कैनन के उपयोग पर मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कड़ा संज्ञान लिया है।

  • इस पुलिसिया कार्रवाई में कुछ डॉक्टरों के घायल होने की बात सामने आई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस उपायुक्त (जोन-2) विकास सहवाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। वे सभी पक्षों की बात सुनकर जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट पुलिस आयुक्त के समक्ष पेश करेंगे।
  • बैरिकेड्स टूटने और वाटर कैनन चलने से मचा था बवाल

    • सोमवार को हमीदिया अस्पताल के इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सीधे मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने का मन बनाया था। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए अस्पताल परिसर में भारी बैरिकेडिंग की थी, लेकिन आक्रोशित छात्र इसे तोड़कर फतेहगढ़ की मुख्य सड़क पर आ गए।

  • जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मोती मस्जिद चौराहे के पास रोका, तो भारी हंगामा हुआ। छात्रों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा, जिससे एक छात्र घायल होकर अस्पताल पहुंच गया। इस तीखी नोकझोंक और प्रदर्शन के चलते क्षेत्र का यातायात बुरी तरह चरमरा गया था।
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    14 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग

    • वर्तमान व्यवस्था के तहत प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों को 14,337 रुपये का मासिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारी इसे बढ़ाकर न्यूनतम 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। इंटर्न डॉक्टर मोहित मिश्रा ने बताया कि प्रशासन ने करीब डेढ़ महीने पहले मौखिक आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ।
    • उन्होंने सवाल उठाया कि जब उत्तर प्रदेश सरकार अपने इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर सकती है, तो मध्य प्रदेश के करीब 3,600 इंटर्न डॉक्टरों के साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है?

    लिखित आदेश मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन

    • डॉक्टरों ने प्रशासन पर आंदोलन को दबाने का भी आरोप लगाया है। उनका दावा है कि सागर से समर्थन देने आ रहे अन्य मेडिकल छात्रों की बस को नादरा बस स्टैंड पर ही रोक लिया गया।
    • इंटर्न डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि उन्होंने अपनी बात पहले संवैधानिक तरीके से रखने की कोशिश की थी, लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। अब जब तक मुख्यमंत्री स्वयं आकर स्टाइपेंड वृद्धि का आधिकारिक लिखित आदेश नहीं सौंपते, उनका यह आंदोलन खत्म नहीं होगा।