
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। नगर निगम में संपत्ति कर वसूली व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली बड़े पैमाने की अनियमितताएं ऑडिट में सामने आई हैं। संपत्ति कर से जुड़े रिकॉर्ड की प्रारंभिक जांच में 500 से अधिक कर खाते संदिग्ध पाए गए हैं, जिनमें कर निर्धारण, संपत्ति के क्षेत्रफल और रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका है।
वार्ड प्रभारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की मिलीभगत
सबसे अधिक गड़बड़ियां जोन-एक के वार्ड-तीन में मिली हैं, जहां 130 से अधिक खातों की जांच की जा रही है। इसके अलावा जोन-दो, छह, सात, 10, 13 और 17 समेत कई जोन में भी कर चोरी और रिकॉर्ड में हेरफेर के मामले सामने आए हैं। जांच में जोनल अधिकारियों (जेडओ), वार्ड प्रभारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की मिलीभगत की आशंका भी सामने आई है।
एक मामले में अनियमितता की पुष्टि होने पर दो कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जा चुका है। अब निगम प्रशासन सभी संदिग्ध खातों का सत्यापन करा रहा है और यह पता लगाया जा रहा है कि किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका से निगम को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचा है।
अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई
निगम प्रशासन का कहना है कि ऑडिट के दौरान सामने आए प्रत्येक मामले की जांच कराई जा रही है और जहां भी राजस्व को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होगी, वहां संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
केस-एक: स्कूल का क्षेत्रफल घटाकर कम किया टैक्स
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला मामला जोन-दो का सामने आया है। जोन-दो के वार्ड-10 में ईदगाह हिल्स स्थित एक निजी स्कूल का पहले 7.71 लाख रुपये का संपत्ति कर निर्धारित किया गया था, लेकिन बाद में स्कूल के क्षेत्रफल में बदलाव कर कर राशि घटाकर करीब 1.09 लाख रुपये कर दी गई। जांच में सामने आया कि जहां पहले भवन का क्षेत्रफल करीब 35 हजार वर्गफीट दर्ज था, वहीं बाद में इसे घटाकर 5,500 वर्गफीट कर दिया गया। क्षेत्रफल कम होने के कारण कर राशि भी काफी घट गई। इस मामले में जोनल अधिकारी और कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका संदिग्ध मिली है।
केस-दो: 14 लाख रुपये की गड़बड़ी
जोन-दो के वार्ड-33 में भी संपत्ति कर में अनियमितता का मामला सामने आ चुका है। यहां करीब 14 लाख रुपये के संपत्ति कर में गड़बड़ी पाई गई थी। जांच के बाद निगम ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में पता चला कि वार्ड प्रभारी की यूजर आईडी और पासवर्ड हासिल कर शिराज उलहक और मोहम्मद समीर ने 14.69 लाख रुपये की 106 रसीदें काटीं, लेकिन यह राशि निगम के खाते में जमा नहीं हुई। जांच के बाद दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कहा कि संपत्ति कर से जुड़े सभी संदिग्ध मामलों की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। जहां भी रिकॉर्ड में गड़बड़ी या राजस्व को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होगी, वहां संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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