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भोपाल में 388 झुग्गियों का 20 हजार करोड़ रुपये की सरकारी जमीन पर कब्जा, खाली कराने में छूट रहे प्रशासन के पसीने

भोपाल में 388 झुग्गी बस्तियां करीब 1500 एकड़ सरकारी भूमि पर बसी हैं। हजारों करोड़ खर्च होने के बावजूद शहर को झुग्गी मुक्त बनाने का लक्ष्य अब तक अधूरा ...और पढ़ें

By Madanmohan malviyaEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Fri, 19 Jun 2026 10:59:17 AM (IST)Updated Date: Fri, 19 Jun 2026 10:59:17 AM (IST)
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भोपाल में 388 झुग्गियों का 20 हजार करोड़ रुपये की सरकारी जमीन पर कब्जा, खाली कराने में छूट रहे प्रशासन के पसीने
भोपाल में 388 झुग्गियों का डेढ़ हजार एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जा। (एआई जनरेटेड)

HighLights

  1. भोपाल में 388 झुग्गियां 1500 एकड़ सरकारी भूमि पर।
  2. जमीन की अनुमानित कीमत 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक।
  3. झुग्गी मुक्त योजना पर अब तक प्रभावी काम नहीं।

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। शहर को झुग्गी मुक्त बनाने की सरकारी कवायद वर्षों से जारी है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद जिला प्रशासन और नगर निगम ने एक बार फिर व्यापक कार्ययोजना तैयार की थी, लेकिन उस पर काम नहीं हो सका है।

शहर में वर्तमान में 388 झुग्गी बस्तियां लगभग डेढ़ हजार एकड़ शासकीय भूमि पर बसी हुई हैं। इन जमीनों की अनुमानित बाजार कीमत 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

बता दें कि तत्कालीन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर अधिकारियों ने योजना बनाई थी, जिसमें पहले चरण में बड़ी झुग्गी बस्तियों को चिह्नित किया था। वहां रहने वाले परिवारों का सत्यापन करने और पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार आवास उपलब्ध करवाकर शासकीय भूमि अतिक्रमण मुक्त करवानी थी।


हजारों करोड़ में है सरकारी भूमि की कीमत

  • जानकारी के अनुसार राजधानी के रोशनपुरा, बाणगंगा, भीमनगर, अर्जुन नगर, पंचशील नगर, संजय नगर, ईदगाह हिल्स, विश्वकर्मा नगर, दुर्गा नगर, बाबा नगर, नया बसेरा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में झुग्गी बस्तियां वर्षों से स्थापित हैं। ये सभी क्षेत्र शहर की प्राइम लोकेशन में शामिल हैं, जहां जमीन की कीमत हजारों रुपये प्रति वर्गफीट तक पहुंच चुकी है।
  • अनुमान है कि करीब डेढ़ हजार एकड़ सरकारी भूमि पर फैली इन 388 बस्तियों की कुल बाजार कीमत 19 से 20 हजार करोड़ रुपये के बीच है। इसके बावजूद संबंधित विभाग अब तक इन जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने में प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सके हैं।

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राजनीतिक दबाव भी बना बड़ी चुनौती

झुग्गी बस्तियां नरेला, उत्तर, मध्य, दक्षिण-पश्चिम, गोविंदपुरा और हुजूर विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में स्थित हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कई बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई राजनीतिक दबाव और स्थानीय विरोध के कारण अधूरी रह जाती है। परिणामस्वरूप शासकीय भूमि पर कब्जे स्थायी स्वरूप लेते गए।

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करोड़ों की योजनाएं, फिर भी अधूरा लक्ष्य

राजीव आवास योजना के तहत लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से ईडब्ल्यूएस आवास निर्मित किए गए, जबकि जेएनएनआरयूएम के अंतर्गत करीब 800 करोड़ रुपये खर्च किए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी डेढ़ हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की जा चुकी है। इसके बावजूद राजधानी को झुग्गी मुक्त बनाने का लक्ष्य अब तक हासिल नहीं हो सका।