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एम्स भोपाल का बड़ा कारनामा, 3D प्रिंटिंग और पैर की हड्डी से बनाया कैंसर मरीज का नया जबड़ा

एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने जबड़े के कैंसर के एक जटिल मामले में थ्री-डी प्रिंटिंग तकनीक की मदद से सफल सर्जरी की है। डॉक्टरों ने ट्यूमर निकालने के बाद मर...और पढ़ें

By mukesh vishwakarmaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 12:48:26 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 12:50:12 PM (IST)
एम्स भोपाल का बड़ा कारनामा, 3D प्रिंटिंग और पैर की हड्डी से बनाया कैंसर मरीज का नया जबड़ा
भोपाल एम्स ने 3D प्रिंटिंग और पैर की हड्डी से बनाया कैंसर मरीज का नया जबड़ा

HighLights

  1. एम्स भोपाल में पैर की हड्डी से बनाया नया जबड़ा
  2. एम्स भोपाल में ही हुई प्रक्रिया
  3. एक महीने बाद सामान्य रूप से खा-बोल पा रहा मरीज

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एम्स) भोपाल के डाक्टरों ने जबड़े के कैंसर के एक जटिल मामले में थ्री-डी प्रिंटिंग तकनीक की मदद से सफल सर्जरी की है। मरीज के दाहिने निचले जबड़े में बड़ा ट्यूमर था। डाक्टरों ने ट्यूमर निकालने के बाद मरीज के बायें पैर की फाइबुला हड्डी से नया जबड़ा तैयार किया। डाक्टरों ने चेहरे की बनावट और दांतों के सही मिलान को बनाए रखने के लिए पहले से तैयार थ्री-डी माडल और सर्जिकल गाइड का इस्तेमाल किया।

मरीज के थ्री-डी मॉडल पर मॉक सर्जरी की गई

खास बात यह रही कि ऑपरेशन से पहले मरीज के थ्री-डी मॉडल पर मॉक सर्जरी की गई। इसके लिए मरीज की सीटी स्कैन रिपोर्ट के आधार पर कंप्यूटर पर जबड़े की थ्री-डी तस्वीर तैयार की गई। फिर तय किया गया कि ट्यूमर को कहां से निकालना है और पैर की हड्डी को किस आकार में काटकर जबड़े में लगाना है।


ऑपरेशन के एक महीने बाद जांच में हड्डी सामान्य रूप से जुड़ती मिली। चेहरे की बनावट भी काफी हद तक सामान्य हो गई। दांतों का मिलान सही है। वह सामान्य रूप से खाना चबा रहा है और बोल पा रहा है।

ट्यूमर निकालने की जिम्मेदारी शल्य आंकोलाजी विभागाध्यक्ष डा. विनय कुमार के नेतृत्व में निभाई गई। वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग और थ्री-डी प्रिंटिंग का काम ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के डा. बाबूलाल सोनी और आर्थोपेडिक्स के डा. सौरभ कुमार सिन्हा ने संभाला। पुनर्निर्माण सर्जरी प्लास्टिक सर्जरी टीम के डा. दीपक कृष्णा और डा. राहुल डुबेपुरिया ने की।

यह भी पढ़ें- AIIMS भोपाल की बड़ी पहल: अब कैंसर व गंभीर मरीजों को घर पर मिलेगी पैलिएटिव केयर सेवा, डॉक्टर और नर्स करेंगे देखभाल

संस्थान में ही वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग और थ्री-डी प्रिंटिंग की सुविधा का उपयोग जटिल सर्जरी में तकनीक आधारित उपचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे आपरेशन का समय और मरीज पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम करने में भी मदद मिल सकती है। - लेफ्टिनेंट जनरल (डा.) नरेंद्र कोतवाल (सेवानिवृत्त), कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल।

क्या यह होती है वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग

जबड़े के बड़े ट्यूमर को निकाल कर हड्डी का हिस्सा दोबारा बनाना होता है। वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग में मरीज की सीटी स्कैन रिपोर्ट को कंप्यूटर पर थ्री-डी रूप में तैयार किया जाता है। डाक्टर पहले ही तय कर लेते हैं कि हड्डी को कहां से काटना है और नई हड्डी को किस तरह लगाना है। इससे आपरेशन के दौरान सर्जरी अधिक सटीक तरीके से की जा सकती है।