पटना-इंदौर एक्सप्रेस का कोच अटेंडेंट कर रहा था दुर्लभ कछुओं की तस्करी, भोपाल में RPF के हत्थे चढ़ा
रेलवे सुरक्षा बल ने पटना-इंदौर एक्सप्रेस में कछुओं की बड़ी तस्करी का भंडाफोड़ किया है। आरोपी इन्हें अवैध रूप से ले जा रहा था। उसे संत हिरदाराम नगर स्ट ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 03 Feb 2026 11:34:18 PM (IST)Updated Date: Tue, 03 Feb 2026 11:38:26 PM (IST)
दुर्लभ कछुए की तस्करी करते पकड़ाया कोट अटेंडेंटHighLights
- दुर्लभ इंडियन टेंट टर्टल की तस्करी
- कोच अटेंडेट को आरपीएफ ने पकड़ा
- इन्हें घर में रखना शुभ माना जाता है
नवदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल: वन्यजीव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए रेलवे सुरक्षा बल ने पटना-इंदौर एक्सप्रेस में कछुओं की बड़ी तस्करी का भंडाफोड़ किया है।आरपीएफ ने कोच एच-1 के अटेंडेंट अजय सिंह राजपूत के पास से दो बैगों में भरे 311 दुर्लभ 'इंडियन टेंट टर्टल' बरामद किए हैं।
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आरोपी इन्हें अवैध रूप से ले जा रहा था, जिसे संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) स्टेशन पर उतारकर वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया। आरोपी से पूछताछ की जा रही है, जिससे तस्करी के गिरोह का पर्दाफाश हो सके। वहीं कोच अटेंडेंट का ऐसा करना रेलवे प्रशासन पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
बता दें कि जब्त किए गए कछुए भारतीय उपमहाद्वीप की दुर्लभ प्रजाति 'इंडियन टेंट टर्टल' हैं। इनकी विशेषताएं इन्हें तस्करों के निशाने पर रखती हैं। इनके कवच का आकार तंबू जैसा उठा हुआ होता है,जिस पर गुलाबी या नारंगी रंग के धब्बे होते हैं। ये आकार में छोटे होते हैं, जिससे इन्हें छिपाना आसान होता है। फेंगशुई और अंधविश्वास के कारण इन्हें घरों में रखना 'शुभ' माना जाता है।साथ ही,अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांस और दवाओं के लिए इनकी भारी तस्करी होती है।
वन्यजीव तस्करी के ट्रांजिट पाइंट के रूप में पहले भी चर्चा में रहा है
- वर्ष 2023: भोपाल स्टेशन पर एक यात्री से लगभग 50 कछुए बरामद किए गए थे, जो उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र ले जाए जा रहे थे।
- वर्ष 2022: चंबल के प्रतिबंधित कछुओं की एक बड़ी खेप इटारसी और भोपाल के रास्ते दक्षिण भारत ले जाते हुए पकड़ी गई थी।
- वर्ष 2019: राजधानी के पास से एसटीएफ वाइल्डलाइफ ने कछुओं की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया था।
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इनका कहना है
आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और कछुओं के स्वास्थ्य की जांच के बाद उन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ने की प्रक्रिया की जाएगी।
-विनोद सिंह, एसडीओ, वन विभाग