
वैभव श्रीधर, नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें जून 2026 में रिक्त होने जा रही हैं, जिसके लिए अप्रैल-मई में चुनाव कराए जाने की संभावना है। 230 सदस्यीय विधानसभा में मौजूदा दलीय स्थिति को देखें तो भारतीय जनता पार्टी के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 65 सदस्य हैं।
एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। ऐसे में गणित के हिसाब से भाजपा दो और कांग्रेस एक सीट जीतने की स्थिति में है, लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रम ने समीकरणों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
हाल ही में ओडिशा और हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग और बिहार में कांग्रेस विधायकों की अनुपस्थिति ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। इसी कारण मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। पार्टी को आशंका है कि कुछ विधायक मतदान के दौरान लाइन से हट सकते हैं, जिससे उसकी एकमात्र संभावित सीट भी खतरे में पड़ सकती है।
कांग्रेस के पास 65 विधायक हैं, लेकिन सभी की स्थिति स्पष्ट नहीं है। सागर जिले की बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दलबदल का मामला लंबित है। विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके मामले में राहत दी है, लेकिन वे मतदान में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। इन परिस्थितियों में कांग्रेस के पास प्रभावी वोटों की संख्या घट जाती है, जिससे चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है।
भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है और वह आसानी से दो उम्मीदवारों को राज्यसभा भेज सकती है। हालांकि, पार्टी भी रणनीतिक रूप से चुनाव को लेकर सतर्क है। केंद्रीय नेतृत्व अन्य राज्यों में हुई घटनाओं को देखते हुए विधायकों पर नजर बनाए हुए है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है। किसी तरह की टूट-फूट की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक परिवार है और हम राहुल गांधी के नेतृत्व में जनहित की लड़ाई लड़ रहे हैं। चुनाव परिणाम सबके सामने आ जाएंगे।
गौरतलब है कि 2020 में हुए राज्यसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुमेर सिंह सोलंकी निर्वाचित हुए थे। सिंधिया के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उपचुनाव में जॉर्ज कुरियन को राज्यसभा भेजा गया था। अब एक बार फिर तीन सीटों पर चुनाव होना है, जिसने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है।