
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। जिले में अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगाने के लिए कलेक्टर के आदेश पर राजस्व और पुलिस अधिकारियों ने मिलकर कार्रवाई शुरू की थी। इसके पहले 113 कॉलोनियों को चिह्नित कर उन पर एफआइआर दर्ज कराई जानी थी, लेकिन 20 दिन में महज 12 अवैध कॉलोनियों पर एफआइआर हो सकी है, जबकि 101 पर कब होगी इसका पता नहीं है। इन अवैध कॉलोनियों की सूची प्रशासन ने पुलिस को सौंप दी है, लेकिन अधिकारी दस्तावेज खंगालने की बात कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि कलेक्टर द्वारा निर्देश देने के बाद भी पुलिस को अवैध कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई करने के लिए सबूत जुटाना पड़ रहे हैं। ऐसे में पुलिस व राजस्व के मैदानी अमले पर अनेक सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिले की शहरी व ग्रामीण सीमा पर लगे इलाकों में कृषि भूमि पर किसानों के साथ मिलकर बिल्डरों व कॉलोनाइजरों ने पिछले तीन साल में 250 से अधिक अवैध कॉलोनियां विकसित कर प्लाट बेचे हैं। इन कॉलोनियों में लोगों को सुविधा के नाम पर सिर्फ रजिस्ट्रियां थमाई गई हैं, जबकि बिजली, पानी, सड़क और नालियों की कोई व्यवस्था नहीं है। इन सुविधाओं के नहीं होने से लोग परेशान होकर तहसील और कलेक्ट्रेट शिकायत लेकर पहुंच रहे थे।
कलेक्टर ने अवैध कॉलोनियों को चिह्नित करने के निर्देश दिए थे, जिस पर हुजूर, कोलार और बैरसिया तहसील में 113 से अधिक अवैध कॉलोनियों को चिह्नित कर कॉलोनाइजरों को नोटिस थमाए थे। वह कलेक्टर न्यायालय में सुनवाई के दौरान किसी भी तरह की अनुमति के दस्तावेज नहीं प्रस्तुत कर पाए थे, तो सभी पर एफआइआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद एसडीएम और तहसीलदार द्वारा संबंधित थानों में एफआइआर दर्ज करवाई जाने की कार्रवाई की जानी थी, लेकिन यह अब पूरी तरह से ठप हो गई है। हुजूर तहसील में ईंटखेड़ी, सूखीसेवनिया और परवलिया सड़क थाने में करीब 12 एफआइआर दर्ज करवाई गई हैं। यहां बुलडोजर तक चलाने की कार्रवाई हुई थी, लेकिन तहसीलदार और पटवारी के आमने-सामने आने के बाद मामला ठंडा हो गया।
बैरसिया तहसील द्वारा थाना पुलिस को छह अवैध कॉलोनियों की सूची सौंपी गई थी, जिनके खिलाफ अब तक एफआइआर नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि अवैध कॉलोनी काटने वाले कॉलोनाइजरों से दस्तावेज मांगे गए हैं, जिसके बाद ही कार्रवाई की जा सकेगी। जबकि एसडीएम ने दोबारा से सर्वे करवाकर रिपोर्ट बनवाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
जिले में अवैध कॉलोनियों को चिह्नित करने के बाद पुलिस को सूची सौंप दी गई है। अब पुलिस द्वारा एफआइआर दर्ज करने के बाद अवैध निर्माणों को तोड़ने की कार्रवाई की जाएगी। - कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर
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