
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। स्वास्थ्य बीमा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में जिला उपभोक्ता आयोग में उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए इलाज में खर्च राशि ब्याज सहित देने के आदेश जारी किए हैं। यह मामला इसलिए खास माना जा रहा है, क्योंकि संबंधित बीमा एक सामाजिक संस्था के माध्यम से देशभर के जैन समुदाय के लिए सामूहिक रूप से कराया गया था। जब उपभोक्ता के पिता को इलाज के बाद क्लेम राशि नहीं मिली, तो उसने बीमा कंपनी के साथ-साथ संस्था के खिलाफ भी याचिका दायर किया।
दरअसल, भोपाल के पटेल नगर निवासी सौरभ जैन ने जिला उपभोक्ता आयोग क्रमांक-2 में मुंबई स्थित बीमा कंपनी और जैन इंटरनेशनल संस्था के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। सौरभ के अनुसार, संस्था द्वारा जैन समाज के सदस्यों के लिए ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस योजना चलाई जा रही थी। उन्होंने “खुशहाल परिवार योजना” के तहत वर्ष 2018-19 से 2023-24 तक नियमित प्रीमियम जमा करते हुए परिवार के चार सदस्यों के लिए 10 लाख रुपये का बीमा लिया था।
दिसंबर 2023 में उनके पिता सुभाष चंद्र को सांस लेने में तकलीफ होने पर अस्पताल में आठ दिन भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 1,06,672 रुपये से अधिक का खर्च आया। सौरभ ने समय पर बीमा कंपनी को सूचना दी और 12 जनवरी 2024 को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ क्लेम प्रस्तुत किया, लेकिन लंबे समय तक न तो भुगतान हुआ और न ही कोई संतोषजनक जवाब मिला।
उपभोक्ता की अधिवक्ता मोना पालीवाल ने बताया कि मामले में जैन इंटरनेशनल संस्था ने दलील दी कि उसने बीमा के लिए कोई शुल्क नहीं लिया, इसलिए वह जिम्मेदार नहीं है। वहीं बीमा कंपनी का कहना था कि 45 दिन के अंदर दावा प्रस्तुत करना होता है, जबकि उपभोक्ता ने 20 दिन के अंदर ही क्लेम किया था। आयोग ने दोनों के तर्क को खारिज कर दिया और पाया कि उपभोक्ता क्लेम राशि पाने का अधिकारी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब प्रीमियम नियमित रूप से जमा किया गया है, तो तकनीकी आधार पर क्लेम रोकना गलत है।
प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर केवल अस्पताल के 55 हजार रुपये के बिल ही प्रमाणित थे। दवाइयों के 41,672 रुपये के खर्च का पर्याप्त प्रमाण न होने के कारण उसे शामिल नहीं किया गया। आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी और संस्था संयुक्त या अलग-अलग रूप से 55 हजार रुपये की राशि सात प्रतिशत ब्याज के साथ दो माह के भीतर अदा करें। इसके अतिरिक्त उपभोक्ता को मानसिक क्षति और परिवाद व्यय के रूप में 25 हजार रुपये भी देने के निर्देश दिए गए हैं। तय समय सीमा में भुगतान न होने पर कुल राशि पर नौ प्रतिशत ब्याज देने का आदेश भी जारी किया गया है।
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