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एमपी में और सस्ती होगी इंजीनियरिंग की पढ़ाई, निजी कॉलेजों ने भेजा फीस में कटौती का प्रस्ताव, छात्रों को रिझाने की कोशिश

मध्य प्रदेश के निजी कॉलेजों से इंजीनियरिंग की पढ़ाई और सस्ती हो जाएगी। कई इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शुल्क विनियामक समिति (एफआरसी) को अपने न्यूनतम शुल्क म...और पढ़ें

By Anjali raiEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 22 Jun 2026 10:24:02 PM (IST)Updated Date: Tue, 23 Jun 2026 07:18:56 AM (IST)
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एमपी में और सस्ती होगी इंजीनियरिंग की पढ़ाई, निजी कॉलेजों ने भेजा फीस में कटौती का प्रस्ताव, छात्रों को रिझाने की कोशिश
मप्र में और सस्ती होगी इंजीनियरिंग की पढ़ाई।

HighLights

  1. उद्योगों की जरूरत से दूर हुआ इंजीनियरिंग का पाठ्यक्रम
  2. यूपी-गुजरात से आधी फीस पर मध्य प्रदेश में बने इंजीनियर
  3. कम आय वाले परिवारों और छात्रों को रिझाने की कोशिश

नवदुनिया भोपाल, प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश के निजी कॉलेजों से इंजीनियरिंग की पढ़ाई और सस्ती हो जाएगी। कई इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शुल्क विनियामक समिति (एफआरसी) को अपने न्यूनतम शुल्क में कटौती का प्रस्ताव भेजा है। उनकी मांग है कि उनके यहां शिक्षण शुल्क 35 हजार रुपये सालाना कर दिया जाए। इसकी मंजूरी मिलती है तो यह निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों के पूरे तंत्र को प्रभावित करेगा।

सीटें खाली रहने से गहराया आर्थिक संकट

दरअसल, निजी संस्थान विद्यार्थियों की कमी से जूझ रहे हैं। पिछले एक दशक में 58 कॉलेज बंद हो चुके हैं। इस बीच केवल एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज खुला है। पिछले वर्षों में इन कॉलेजों की औसतन 45 से 55 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश हो पाए। वहीं, सरकारी कॉलेजों में 80 से 90 प्रतिशत सीटें भर जाती हैं।


विशेषज्ञों की राय और घटते प्रवेश के कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योगों की जरूरतों और इंजीनियरिंग कोर्स के बीच बढ़ती दूरी, रोजगार को लेकर विद्यार्थियों की बदलती प्राथमिकताएं और नई तकनीकों के अनुरूप पाठ्यक्रम का समय पर अपडेट नहीं होना इसका प्रमुख कारण है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में अधिकतर प्रवेश दूसरे राज्यों के विद्यार्थी लेते हैं।

कटौती का प्रस्ताव देने वाले कॉलेजों का तर्क है कि सीटें खाली रहने के कारण प्रति विद्यार्थी लागत बढ़ रही है। इससे संस्थान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। यदि शुल्क कम नहीं की गई तो संचालन और मुश्किल हो जाएगा। कहा जा रहा है कि शुल्क कटौती से दूसरे प्रदेश के विद्यार्थियों के अलावा प्रदेश के कम आय वाले परिवारों के बच्चे भी आकर्षित होंगे।

दूसरे राज्यों में महंगी है शिक्षा

उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात जैसे पड़ोसी राज्यों में इंजीनियरिंग का वार्षिक शुल्क औसतन एक से डेढ़ लाख रुपये तक है। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने भी न्यूनतम शुल्क करीब 80 हजार रुपये तय किया है। इसके उलट मध्यप्रदेश में यह शुल्क 40 से 60 हजार रुपये तक है।

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इंजीनियरिंग में प्रवेश का पांच साल का आंकड़ा

वर्ष कॉलेज सीटें प्रवेशित
2021-22 126 47,520 28,534
2022-23 124 58,535 31,659
2023-24 123 60,754 33,334
2024-25 142 73,637 42,924
2025-26 128 64,473 38,171

उप्र, महाराष्ट्र, तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों की तुलना में यहां इंजीनियरिंग का शुल्क कम है। इस कारण यहां पर दूसरे राज्यों के विद्यार्थी भी प्रवेश लेते हैं। कुछ कालेज विवि में कन्वर्ट हो रहे हैं, इसलिए वे काउंसलिंग में शामिल नहीं हो रहे हैं।- डॉ. अजीत सिंह पटेल, उपाध्यक्ष, एसोसिएशन आफ टेक्निकल प्रोफेशनल इंस्टि्टयूशंस मप्र

पांच-छह इंजीनियरिंग कालेजों से शुल्क तय करने के प्रस्ताव आए हैं। समिति कालेजों का लेखा-जोखा देखकर न्यूनतम शुल्क तय करती है। इसपर विचार किया जा रहा है।- डॉ. अनिल शिवानी, सचिव, एफआरसी