
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे में बदलाव करने जा रही है। 'मुख्यमंत्री शहरी विकास अधोसंरचना-5' के तहत 5,000 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। इस विशाल बजट का उपयोग जर्जर पाइपलाइनों की मरम्मत करने और उन्हें बदलने के लिए किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से अमृत परियोजनाओं के अंतराल (गैप) को भरा जाएगा और लंबे समय से लंबित सीवरेज व वाटर सप्लाई के कार्यों को गति दी जाएगी।
इंदौर के भागीरथपुरा जैसी जल प्रदूषण की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राज्य सरकार ने 10 जनवरी से एक राज्यव्यापी 'स्वच्छ जल अभियान' संचालित किया है। "जल सुरक्षा, जल संरक्षण, जल जागरूकता और जल सुनवाई" की थीम पर आधारित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को आपूर्ति किए जा रहे पानी की गुणवत्ता की जांच करना और जल प्रदाय प्रणाली में जनता का भरोसा बहाल करना है। इस अभियान के तहत अब तक 90,453 पानी के नमूने लिए गए, जिनमें से 973 सैंपल फेल पाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि 9,801 अमृत मित्र महिलाएं घर-घर जाकर पानी के सैंपल एकत्र करने के इस महत्वपूर्ण कार्य में जुटी हुई हैं।
पानी की गुणवत्ता से समझौता करने वाली और सीवरेज कार्य में लापरवाही बरतने वाली 10 से अधिक ठेका कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। पारदर्शिता और जन-सुनवाई के लिए हर मंगलवार को विशेष 'जल सुनवाई' आयोजित की जा रही है। इस पहल के माध्यम से पानी के प्रदूषण से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता से सुलझाया जा रहा है, और अब तक कुल 2,821 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है।
जल प्रदाय प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए सप्लाई लाइनों और सीवर लाइनों के लीकेज और क्रॉसिंग पॉइंट्स की पहचान की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक पहचाने गए 15,718 लीकेज में से 14,661 की मरम्मत पूरी की जा चुकी है। इसके साथ ही, प्रदेश के 3,298 ओवरहेड टैंकों में से 3,144 टैंकों की सफाई का कार्य संपन्न हो चुका है, ताकि जमा गंदगी से पानी दूषित न हो।
पेयजल स्रोतों की सुरक्षा के मद्देनजर प्रदेश के 21,215 ट्यूबवेलों में से 9,668 की गुणवत्ता जांच की गई है। इस जांच के दौरान 185 ट्यूबवेल प्रदूषित पाए गए, जिन्हें तत्काल प्रभाव से पीने के पानी के उपयोग के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर शहर और गांव 'वाटर सेफ' (पानी के मामले में सुरक्षित) बने और नागरिकों को शुद्ध जल का मौलिक अधिकार मिल सके।