
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। दिल्ली की खुली सोच और स्वतंत्र माहौल में पली-बढ़ी त्विषा शर्मा के लिए शादी के बाद भोपाल का ससुराल धीरे-धीरे एक ऐसे कैदखाने में बदल गया था, जहां उसकी जिंदगी पर उसका खुद का अधिकार खत्म होता जा रहा था। स्वजनों का आरोप है कि रिटायर्ड जज सास गिरिबाला सिंह का व्यवहार उसके प्रति “जेलर” जैसा था, जबकि पति समर्थ सिंह लगातार उसे मानसिक प्रताड़ना देता था। ट्विषा की बहन स्वाति, भाई आशीष और चाचा अशोक शर्मा ने नवदुनिया से बातचीत में दावा किया कि शादी के कुछ ही महीनों में त्विषा पूरी तरह टूट चुकी थी। वह हर दिन खुद को नियंत्रित, अपमानित और अकेला महसूस कर रही थी।
त्विषा की ममेरी बहन स्वाति का कहना है कि सगाई के दौरान हम जहां भरे-पूरे परिवार के साथ समारोह में शामिल हुए थे, वहीं दूसरी तरफ से सिर्फ समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह ही मौजूद थे। परिवार को तभी से उनका व्यवहार असामान्य लगा था। गिरिबाला सिंह ने रिश्ता तय होने से पहले पूरे परिवार का “बायोडाटा” मांगा था। कौन क्या करता है, कहां रहता है, रिश्तेदार कौन हैं, हर बात की पड़ताल की गई। हमें लगा था कि अनुशासित और पढ़ा-लिखा परिवार है, लेकिन बाद में महसूस हुआ कि हर चीज को शक की नजर से देखा जाता था।
त्विषा एक जर्मन कंपनी में कम्युनिकेशन मैनेजर थी और वर्क फ्रॉम होम करती थी। शादी के बाद भी वह मीटिंग्स के लिए बाहर जाती थी, लेकिन कुछ ही समय बाद नौकरी छोड़नी पड़ी। परिवार का आरोप है कि शादी के बाद उस पर लगातार दबाव बढ़ता गया। आर्थिक रूप से भी वह दूसरों पर निर्भर होती चली गई। नौकरी छूटने के बाद वह रुपयों को लेकर परेशान रहने लगी थी और खुद को असुरक्षित महसूस करती थी।
स्वजन ने आरोप लगाया कि त्विषा के खाने-पीने तक पर नियंत्रण रखा जाता था। उसे बार-बार कहा जाता था कि ज्यादा मत खाओ, नहीं तो बच्चा कंसीव नहीं कर पाओगी। त्विषा जब खाने के लिए किचन में जाती थी तो उसे खाना गायब मिलता था। सास गिरिबाला जबरन उसे सुबह-शाम वॉक पर भेजती थीं। वहां एक-एक घंटे तक वॉक करवाई जाती थी। चाचा अशोक का आरोप है कि शादी के समय त्विषा का वजन करीब 80 किलो था, लेकिन पांच महीने में उसका वजन 15 किलो तक कम हो गया।
भाई आशीष का कहना है कि रिश्ता अलग-अलग दो समाजों में हुआ था। हम ब्राह्मण परिवार के हैं तो गिरिबाला सिंह को लगता था कि त्विषा हमेशा पूजा-पाठ करती रहे। उस पर लगातार व्रत रखने और धार्मिक नियमों का पालन करने का दबाव बनाया जाता था। सास सावन सोमवार का व्रत जबरन रखने का दबाव बनाती थी। समय पर उठना, नहाना, सोना और दिनचर्या का पालन करना उसके लिए मजबूरी बना दिया गया था। त्विषा कहती थी कि जिंदगी पर उसका खुद का कंट्रोल नहीं बचा है।
बहन स्वाति ने बताया कि शादी के कुछ दिन बाद दिसंबर 2025 में दोनों वियतनाम हनीमून के लिए गए थे। उसी दौरान ही समर्थ सिंह ने उसके साथ दुर्व्यवहार शुरू कर दिया था। एयरपोर्ट पर उसे धक्का दिया गया था, जिसके बाद त्विषा ने परिवार को पहली बार अपने रिश्ते में तनाव की जानकारी दी थी। हालांकि तब परिवार ने इसे नई शादी का सामान्य विवाद समझकर नजरअंदाज कर दिया था।
भाई आशीष और चाचा अशोक का आरोप है कि अप्रैल महीने में त्विषा के गर्भवती होने की जानकारी मिली थी। जिसके बाद पति समर्थ ने तो सीधे तौर पर त्विषा के चरित्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह उसका बच्चा नहीं है। इन सभी बातों से प्रताड़ित होकर जब त्विषा अपने मायके नोएडा पहुंची तो कुछ दिन बाद ही सास गिरिबाला ने फोन कर धमकाया कि यदि वापस ससुराल नहीं भेजा गया तो रिश्ता खत्म हो जाएगा। स्वजनों ने यह भी आरोप लगाया कि समर्थ नशे का आदी था। इस बात से त्विषा घबरा गई थी।
त्विषा शर्मा अपने परिवार का गर्व और उम्मीदों का चेहरा थी। स्कूल के दिनों में भाई-बहनों की पहचान उसके नाम से होती थी। पढ़ाई, सौंदर्य प्रतियोगिताएं, मॉडलिंग, अभिनय और कॉर्पोरेट नौकरी, हर क्षेत्र में उसने अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन जिंदगी के रंगों से खेलना पसंद करने वाली यह लड़की अब अधूरे सपनों की कहानी बन गई है।
त्विषा के पिता नवनिधि शर्मा का कहना है कि वह बेहद प्रतिभाशाली थी। उसे हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, रूसी और तेलुगू भाषा का अच्छा ज्ञान था। वह नई चीजें सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में विश्वास रखती थी। मूलतः हाथरस (उप्र) की रहने वाली त्विषा, पुणे और फिर दिल्ली में रही। उसके पिता नवनिधि शर्मा एक रूसी फार्मास्यूटिकल कंपनी में नौकरी करते थे। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने दवा इम्पोर्ट का व्यापार शुरू किया।
बहन स्वाति ने बताया कि त्विषा की शुरुआती पढ़ाई हाथरस के सेंट फ्रांसिस स्कूल में हुई। दसवीं तक की पढ़ाई के बाद पिता के पुणे ट्रांसफर होने पर पूरा परिवार वहां शिफ्ट हो गया। पुणे में उसने 12वीं की पढ़ाई पूरी की और इंदिरा कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई के साथ-साथ वह सांस्कृतिक गतिविधियों में भी हमेशा आगे रहती थी। कॉलेज में ही उसने मॉडलिंग की शुरुआत कर दी थी। कॉलेज के दिनों में त्विषा ने कई सौंदर्य प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। वर्ष 2012 में उसने “मिस पुणे” का खिताब जीता था। इसके अलावा कॉलेज की “बेस्ट ब्राइड” प्रतियोगिता में भी उसे सम्मान मिला था।
मॉडलिंग में सफलता के बाद एक्टिंग की दुनिया में त्विषा की एंट्री हुई। पिता के अनुसार दो तेलुगू फिल्मों में भी काम किया था। इनमें से फिल्म मुग्गुरू मोनागल्लू ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम पर रिलीज हुई थी। अब तक फिल्म को ज्यादा सफलता नहीं मिली थी, लेकिन त्विषा की मौत के बाद यह फिल्म हिट हो गई है। लोग ऑनलाइन त्विषा को सर्च कर रहे हैं और उसके बाद फिल्म के व्यूज काफी ज्यादा बढ़ गए हैं।
वर्ष 2016 में परिवार पुणे से दिल्ली और फिर नोएडा में शिफ्ट हो गया था। पिता फार्मास्यूटिकल सेक्टर से जुड़े रहे और बाद में मेडिसिन इम्पोर्ट का कारोबार करने लगे। उन्होंने नोएडा में ही मकान खरीद लिया था और वहीं सेटल हो गए थे। उधर फिल्मी दुनिया से दूरी बनाने के बाद त्विषा एक विदेशी कंपनी में कम्युनिकेशन मैनेजर के पद पर काम कर रही थी। कॉर्पोरेट करियर के बावजूद उसकी रुचि कानून की पढ़ाई में थी। वह आगे वकालत करना चाहती थी और इसके लिए किताबें भी मंगवा चुकी थी। कानूनी बैकग्राउंड के परिवार में शादी के बाद वह चाहती थी कि सास गिरिबाला और पति समर्थ उसकी मदद करें।
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मौत से पहले त्विषा पेंटिंग भी सीखना चाहती थी। 12 मई की रात मौत से कुछ ही देर पहले त्विषा ने अपने ईकॉमर्स अकाउंट से पेंट और ब्रश ऑर्डर किए थे। ये सामान 15 मई को घर पहुंचे। बहन स्वाति ने बताया कि मां और भाई भी उसी ईकॉमर्स अकाउंट का उपयोग करते थे, जिससे उन्हें ऑर्डर की जानकारी थी। स्वजनों का कहना है कि जिस लड़की के मन में भविष्य के इतने सपने हों, वह अचानक जिंदगी खत्म करने जैसा कदम नहीं उठा सकती।
त्विषा ने जिस दिन मौत को गले लगाया दरअसल वह त्विषा और उसके पति समर्थ के लिए बेहद खास दिन था। डेटिंग ऐप पर मिलने के बाद 12 मई 2025 को ही त्विषा और समर्थ की सगाई दिल्ली में हुई थी। ठीक एक साल बाद इसी दिन त्विषा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है।