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वैश्विक पहचान की ओर बढ़ेगा प्रदेश का हस्तशिल्प: भोपाली बटुआ, खजुराहो के मेटल क्राफ्ट की अब दुनिया में बढ़ेगी धाक; चार उत्पादों को मिला GI टैग

राज्य के पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में भोपाली बटुआ एवं जरी क्राफ्ट (जरी-जरदोजी) समेत प्रदेश के चार विशिष्ट उ...और पढ़ें

By Sushil PandeyEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Mon, 15 Jun 2026 09:00:55 AM (IST)Updated Date: Mon, 15 Jun 2026 09:00:55 AM (IST)
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वैश्विक पहचान की ओर बढ़ेगा प्रदेश का हस्तशिल्प: भोपाली बटुआ, खजुराहो के मेटल क्राफ्ट की अब दुनिया में बढ़ेगी धाक; चार उत्पादों को मिला GI टैग
भोपाली बटुआ-जरी क्राफ्ट समेत मप्र के चार उत्पादों को मिला GI टैग।

HighLights

  1. भोपाली बटुआ-जरी क्राफ्ट समेत मप्र के चार उत्पादों को मिला GI टैग
  2. GI टैग से उत्पादों को वैश्विक पहचान और नकली उत्पादों से सुरक्षा मिलेगी
  3. स्थानीय शिल्पकारों और महिला कारीगरों की आय बढ़ाने में मिलेगा बड़ा सहारा

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प को बड़ी पहचान मिली है। भोपाली बटुआ एवं जरी क्राफ्ट सहित प्रदेश के चार विशिष्ट उत्पादों को प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है। इससे इन उत्पादों को कानूनी संरक्षण मिलने के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान भी मिलेगी।

‘जीआई मैन ऑफ इंडिया’ रजनीकांत का रहा योगदान

इस उपलब्धि में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। नाबार्ड ने वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और शिल्पकार समूहों के साथ समन्वय स्थापित कर पूरी प्रक्रिया को गति दी। वहीं, मध्य प्रदेश एमएसएमई विभाग और ‘जीआई मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध पद्मश्री रजनीकांत के तकनीकी सहयोग ने भी अहम योगदान दिया।


विशेषज्ञों का मानना है कि GI टैग मिलने से प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी, नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और स्थानीय कारीगरों, विशेषकर महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार एवं आय के नए अवसर मिलेंगे।

यह भी पढ़ें- अब विश्व में चमकेगा ‘पन्ना का हीरा’, मिला GI Tag, अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिलेगी एक विशिष्ट पहचान

इन चार उत्पादों को मिला GI टैग

- भोपाली बटुआ एवं जरी क्राफ्ट (भोपाल) : जरी-जरदोजी की बारीक कारीगरी और नवाबी नफासत का प्रतीक।

- खजुराहो मेटल क्राफ्ट (छतरपुर) : पीतल और अन्य धातुओं पर उत्कृष्ट हस्तकला।

- मालवा पेंटिंग (मुख्यतः धार) : मालवा अंचल की पारंपरिक लोक चित्रकला।

- सारंगपुर हैंडलूम साड़ी एवं फैब्रिक्स (राजगढ़) : उच्च गुणवत्ता वाले पारंपरिक हथकरघा वस्त्र।

GI टैग से होंगे ये लाभ

- उत्पादों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी।

- नकली और नकल उत्पादों की बिक्री पर कानूनी रोक लगेगी।

- स्थानीय कारीगरों, विशेषकर महिलाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर सृजित होंगे।