
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 10 फरवरी से शुरू हो रही हैं। इससे पहले ही जालसाजों ने टेलीग्राम सहित इंटरनेट मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर फर्जी प्रश्नपत्र बेचने का नेटवर्क सक्रिय कर दिया। जालसाजों ने विद्यार्थियों को भ्रमित करने के लिए प्रश्नपत्रों पर बाकायदा माशिमं भोपाल का लोगो और मोनोग्राम भी लगाया है। हाल ही में सामने आए मामलों की शिकायत माशिमं ने साइबर क्राइम पुलिस से की है।
साथ ही 20 से अधिक संदिग्ध ग्रुपों को चिह्नित किया है, जो विद्यार्थियों से 200 से 500 रुपये लेकर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा कर रहे हैं। नार्मल, गोल्ड और प्लेटिनम पैकेज के नाम पर प्रश्नपत्रों की अलग-अलग कीमत तय कर रखी है। माशिमं ने ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। प्रश्नपत्रों को इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित करने वाले शिक्षक, कर्मचारी व अन्य लोगों के खिलाफ तीन साल तक की जेल और आर्थिक दंड का प्रविधान किया है।
माशिमं ने इस बार नकल और प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की है। मंडल की ओर से पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो साइबर क्राइम टीम के साथ मिलकर इंटरनेट मीडिया पर नजर रखेगी। हर जिले में जिला स्तरीय समितियां भी बनाई गई हैं, जिसमें कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, संभागीय संयुक्त संचालक, संभागीय अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी शामिल हैं। मंडल मुख्यालय स्तर पर भी नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर परीक्षा संचालन पर ऑनलाइन निगरानी होगी।
स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से कहा है कि यदि उन्हें इंटरनेट मीडिया या अन्य माध्यमों से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का कोई प्रस्ताव मिलता है तो उस पर विश्वास न करें। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय या कलेक्टर को तत्काल सूचना दें, ताकि सख्त कार्रवाई की जा सके। विभाग ने विद्यार्थियों को अलर्ट किया है।
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साइबर क्राइम को पत्र लिखकर निगरानी करने और एफआइआर दर्ज करने के लिए कहा गया है। प्रश्नपत्रों का इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित होने से बचाने के लिए साइबर सेल से मदद ली जा रही है। - बुद्धेश कुमार वैद्य, सचिव, माशिमं।