
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी के गांधी मेडिकल कालेज (जीएमसी) से संबद्ध अस्पतालों में अब मरीजों को एंटीबायोटिक दवाएं डॉक्टर के केवल अनुभव या अंदाजे (अनुमान) से नहीं दी जाएंगी।
दवाओं के बेअसर होने (ड्रग रेजिस्टेंस) की वैश्विक समस्या को देखते हुए जीएमसी ने एक नया 'रोडमैप' तैयार किया है। इसके तहत अब मरीजों को पूरी तरह से वैज्ञानिक सबूतों और रीयल-टाइम डेटा के आधार पर दवाएं दी जाएंगी। इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की खास "अवेयर" तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
दवाओं के प्रतिरोधक खतरे को रोकने की तैयारी
अक्सर देखा गया है कि दवाओं के गलत या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से शरीर में उनके प्रति प्रतिरोधक क्षमता बन जाती है। नतीजा यह होता है कि गंभीर बीमारी के समय दवाएं असर करना बंद कर देती हैं। इसी खतरे को टालने के लिए जीएमसी के विशेषज्ञ अब "डिफाइंड डेली डोज" तकनीक अपनाएंगे, जो सॉफ्टवेयर के जरिए दवा की बिल्कुल सटीक मात्रा बताएगी।
फार्माकोलाजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जे.एल. मार्को का कहना है कि हमारा लक्ष्य दवाओं के दुरुपयोग को रोकना है। इस नई व्यवस्था से यह तय होगा कि एंटीबायोटिक दवा तभी दी जाए जब वह वास्तव में मरीज के लिए जरूरी हो।
डिजिटल मॉनिटरिंग और सॉफ्टवेयर से निगरानी
कैसे काम करेगी यह नई व्यवस्था? इसके लिए जूनियर डॉक्टर्स हर मरीज का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से रखेंगे। इसमें बीमारी का नाम और दी गई दवा का शरीर पर क्या असर हुआ, इसकी पल-पल की जानकारी होगी। दवाओं को तीन रंगों या श्रेणियों (सामान्य, निगरानी और सुरक्षित) में बांटा जाएगा। "रिजर्व" यानी सबसे असरदार दवाओं का उपयोग तभी होगा जब बहुत ज्यादा जरूरत हो। यदि किसी विभाग में जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक लिखी जा रही होगी, तो सॉफ्टवेयर तुरंत इसकी जानकारी सीनियर डॉक्टरों को दे देगा। इससे दवाओं का बेवजह इस्तेमाल रुकेगा।
मरीजों को मिलेगा बेहतर इलाज और कम साइड इफेक्ट
जीएमसी, भोपाल के प्रभारी डीन डॉ. आर.पी. कौशल का कहना है कि आज के समय में एंटीबायोटिक का बेअसर होना एक बड़ी चुनौती है। जीएमसी में डेटा-आधारित तकनीक आने से हम यह तय कर पाएंगे कि किस मरीज को कितनी और कौन सी दवा देनी है। इससे मरीजों का इलाज बेहतर होगा और दवाओं के नुकसान (साइड इफेक्ट) से भी बचाव होगा।
इन बातों का रखें खास ख्याल
अब मरीज की जरूरत के हिसाब से ही दवा की मात्रा तय होगी।
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर रखेगा डॉक्टरों के पर्चों पर नजर।
दवाएं बेअसर न हों, इसके लिए 'रिजर्व' एंटीबायोटिक का सोच-समझकर होगा उपयोग।