
अंजली राय, नईदुनिया, भोपाल। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारों को निर्देश दिए हैं कि वे स्कूली छात्राओं को फ्री सैनिटरी पैड उपलब्ध कराएं। यह उनकी सेहत, समानता और सम्मान से जुड़ा मामला है। राज्य सरकार कई वर्षों से सातवीं से 12वीं तक की स्कूली छात्राओं को सालाना 300 रुपये सैनिटरी पैड खरीदने के लिए देती है।
अफसोस यह कि तमाम छात्राओं और बहुत से अध्यापकों तक को पता नहीं है कि यह रकम उन्हें क्यों मिलती है। प्रदेश सरकार छात्राओं की सेहत के लिए स्वच्छता और स्वास्थ्य, सैनिटेशन-हाइजीन योजना चला रही है। इसके तहत 19 लाख छात्राओं के खातों में हर साल 57 करोड़ रुपये भेजे जाते हैं। लेकिन इसके बारे में स्कूलों में कभी बात ही नहीं होती।
ऐसे में छात्राओं को जानकारी ही नहीं है कि उनके खाते में जो 300 रुपये आए हैं, उनसे सेनेटरी पैड खरीद सकती हैं। छात्राएं इस राशि को दूसरी जरूरतों पर खर्च कर देती हैं। भोपाल में शासकीय नवीन कन्या उमावि की छात्राओं ने बताया कि वे इस राशि को छात्रवृत्ति समझकर खर्च कर रही हैं।
उन्हें यह नहीं पता कि 300 रुपये की राशि सेनेटरी पैड के लिए मिलती है। वहीं महारानी लक्ष्मी बाई स्कूल की छात्राओं ने बताया कि उन्हें न तो स्कूल में कभी मुफ्त सैनिटरी पैड मिले और न ही किसी शिक्षक या अधिकारी ने बताया कि सरकार पैड के लिए उनके खाते में रुपये भेजे जा रहे हैं।
छात्राओं का कहना है कि अगर यह पैसा पैड खरीदने के लिए है तो नाकाफी है। सामान्य तौर पर मासिक की अवधि चार से पांच दिन की होती है। इस दौरान कम से कम 15 पैड लगते हैं। बाजार में इनकी सबसे सस्ती कीमत 90 से 130 रुपये के बीच है। 12 महीनों के लिए 1020 से 1360 रुपये खर्च होते हैं। यह रकम भी कम से इस खर्च के अनुरूप तो होनी चाहिए।
भोपाल जिले में योजना का यह हालइस योजना के तहत भोपाल जिले के 33,850 छात्राओं के खाते में सैनिटरी पैड के लिए 1.15 करोड़ भेजे जाते हैं। इस योजना के बारे में हकीकत यह सामने आया कि स्कूलों में न सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए गए और न ही छात्राओं को इस योजना के बारे में सही जानकारी दी गई।
प्रदेश के स्कूलों में बालिकाओं के लिए अलग शौचालय का बुरा हाल है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 2,787 स्कूलों में बालिकाओं के लिए अलग शौचालय नहीं हैं। वहीं जहां बने हैं उनमें से 9835 शौचालय काम लायक नहीं हैं। इनके नहीं होने से कई छात्राएं स्कूल छोड़ चुकी हैं।
अब संकुल प्राचायों और शिक्षकों के जरिए सैनिटरी पैड के लिए सरकार द्वारा भेजी जाने वाली राशि के बारे में छात्राओं को अवगत कराया जाएगा। साथ ही सरकारी स्कूलों में जागरुकता अभियान चलाएंगे।एनके अहिरवार, जिला शिक्षा अधिकारी, भोपाल।
यह भी पढ़ें- इंदौर में पेयजल जांच में 51 नलकूप फेल, प्रशासन अब 'लाल निशान' लगाकर करेगा आगाह, पीने के उपयोग पर लगी रोक
वर्तमान में एक छात्रा को 300 रुपये सैनिटरी पैड के लिए दिए जाते हैं। अधिक राशि बढ़ाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। स्कूलों में बालिका शौचालयों के लिए बजट जारी किया गया है। मार्च तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति स्कूलों में जागरुकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे- डा. संजय गोयल, सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग।