भोपाल में 'पेड़ काटकर ठूंठ पर सजाया गमला': ब्रिक्स सम्मेलन में विदेशी मेहमानों को 'नकली हरियाली' दिखाने की कवायद
ब्रिक्स सम्मेलन में आने वाले विदेशी प्रतिनिधियों के सामने शहर को हरा-भरा दिखाने के लिए यह अस्थायी व्यवस्था की जा रही है।
Publish Date: Wed, 05 Aug 2026 04:23:13 PM (IST)Updated Date: Wed, 05 Aug 2026 04:24:34 PM (IST)
मेट्रो निर्माण के लिए काटे गए दशकों पुराने पेड़ों के ठूंठों पर अब गमले रखकर हरियाली का स्वरूप देने की तैयारी की गई। नईदुनिया।HighLights
- पेड़ों के ठूंठों पर गमले रखकर हरियाली का दिखावा
- ब्रिक्स सम्मेलन से पहले सजावट के लिए की गई अस्थायी व्यवस्था
- जनशिकायत: पुराने छायादार पेड़ों की भरपाई गमलों से नहीं हो सकती
नईदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। झीलों की नगरी भोपाल में विकास परियोजनाओं की कीमत अब शहर की हरियाली चुका रही है। मेट्रो रेल के ब्लू लाइन एलिवेटेड कारिडोर के लिए ऐतिहासिक मिंटो हाल (पुरानी विधानसभा) के सामने दशकों पुराने छायादार पेड़ों को काट दिया गया था।
अब इन्हीं पेड़ों के ठूंठों पर मंगलवार को गमले रखकर हरियाली सजाने की कवायद शुरू हो गई है, जो किब्रिक्स सम्मेलन में आने वाले विदेशी मेहमानों के सामने महज दिखावा साबित होगी।
जानकारी के अनुसार मिंटो हाल के सामने लगे ये पेड़ वर्षों से न सिर्फ शहर की सुंदरता बढ़ा रहे थे, बल्कि व्यस्त बस स्टाप पर यात्रियों के लिए प्राकृतिक छांव का सहारा भी थे। गर्मी के दिनों में जहां लोग इन पेड़ों के नीचे खड़े होकर बसों का इंतजार करते थे, वहां अब धूप, धूल और कंक्रीट का माहौल नजर आ रहा है।
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पेड़ काटकर गमलों से की जा रही भरपाई
पर्यावरण प्रेमी उमाशंकर तिवारी का कहना है कि मेट्रो जैसी आधुनिक सुविधा जरूरी है, लेकिन विकास के नाम पर पुराने पेड़ों को हटाने के बाद उनकी भरपाई केवल गमले रखकर नहीं की जा सकती। जिन पेड़ों को तैयार होने में दशकों लगे, उनकी जगह नए पेड़ कब और कहां लगाए जाएंगे?
हालांकि मेट्रो अधिकारियों ने बताया कि एलिवेटेड कारिडोर निर्माण के लिए पेड़ों को हटाना आवश्यक था और इसके लिए सभी वैधानिक अनुमतियां ली गई थीं। पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए पुन: पौधारोपण की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी को दी गई है।
भोपाल की ग्रीन सिटी पहचान पर खड़े हुए सवाल
पर्यावरणविद राशिद नूर खान का कहना है कि ऐतिहासिक इमारतों और शहर के प्रमुख मार्गों से पुराने पेड़ों का खत्म होना गंभीर चिंता का विषय है। हरियाली केवल सजावट नहीं बल्कि शहर के पर्यावरण संतुलन का आधार है।
मेट्रो के नाम पर पेड़ों की कटाई और बाद में गमलों से हरियाली दिखाने की कोशिश ने भोपाल की ग्रीन सिटी पहचान पर सवाल खड़े कर दिए हैं।