
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की महत्वाकांक्षी ड्रोन सेवा योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है। इस योजना के तहत बैतूल और छिंदवाड़ा जैसे दुर्गम आदिवासी इलाकों तक ड्रोन के माध्यम से दवाएं और सर्जिकल उपकरण पहुंचाने की तैयारी थी, लेकिन 200 किमी रेंज वाले ड्रोन की उपलब्धता न होने से प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका।
करीब पौने दो साल पहले एम्स भोपाल ने बेंगलुरु की एक निजी कंपनी के साथ मिलकर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। फरवरी 2024 में हुए ट्रायल में ‘मेड-इन-इंडिया’ ड्रोन ने एम्स से रायसेन जिले के गौहरगंज स्वास्थ्य केंद्र तक लगभग 40 किमी की दूरी महज 20 मिनट में तय की थी, जबकि सड़क मार्ग से यही दूरी तय करने में करीब 1 घंटा 20 मिनट लगता है। यह ड्रोन पांच किलो तक वजन ले जाने और कोल्ड चेन बनाए रखने में सक्षम था।
सफल ट्रायल के बाद एम्स प्रबंधन ने योजना का विस्तार करते हुए 200 किमी तक उड़ान भरने वाले ड्रोन की आवश्यकता जताई, ताकि बैतूल और छिंदवाड़ा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को कवर किया जा सके। हालांकि, संबंधित कंपनी के पास इतनी क्षमता का ड्रोन उपलब्ध नहीं था, जिससे योजना पर तकनीकी पेंच फंस गया और प्रोजेक्ट ठप हो गया।
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ड्रोन सेवा शुरू न होने का सबसे ज्यादा असर ट्राइबल इलाकों के मरीजों पर पड़ रहा है। योजना के तहत इन क्षेत्रों से ब्लड सैंपल ड्रोन के जरिए एम्स भेजे जाने थे और जीवनरक्षक दवाएं वापस पहुंचाई जानी थीं। फिलहाल इन इलाकों से जांच रिपोर्ट आने में हफ्तों का समय लग रहा है और इमरजेंसी में दवाएं पहुंचाना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
एम्स प्रबंधन अब ऐसी एजेंसी की तलाश में है, जो 200 किमी तक उड़ान भरने में सक्षम आधुनिक ड्रोन उपलब्ध करा सके। इसके लिए नए टेंडर और फंडिंग की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हालांकि योजना दोबारा कब शुरू होगी, इस पर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है।
एम्स प्रबंधन लंबी दूरी वाले ड्रोन कंपनी की तलाश कर रहा है। जैसे ही कंपनी मिलती है, इस योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। - डॉ. केतन मेहरा, पीआरओ, एम्स, भोपाल