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अगले 24 वर्षों में 60 प्रतिशत 'छोटा' हो जाएगा भोपाल का बड़ा तालाब! AI स्टडी में हुआ हैरान करने वाला खुलासा

सदियों से भोपाल की पहचान से जुड़ा बड़ा तालाब शहर की जीवनरेखा है। यह अब भी 40 प्रतिशत शहरियों की प्यास बुझा रहा है। इसकी अथाह जलराशि देखकर अंदाजा नहीं ...और पढ़ें

By Anjali raiEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Sun, 02 Aug 2026 06:10:35 PM (IST)Updated Date: Sun, 02 Aug 2026 06:10:35 PM (IST)
अगले 24 वर्षों में 60  प्रतिशत 'छोटा' हो जाएगा भोपाल का बड़ा तालाब! AI स्टडी में हुआ हैरान करने वाला खुलासा
अगले 24 वर्षों में 60 प्रतिशत 'छोटा' हो जाएगा भोपाल का बड़ा तालाब!

HighLights

  1. बड़ा तालाब भोपाल की 40 प्रतिशत आबादी की बुझाता है प्यास
  2. 2050 तक 60 प्रतिशत घट सकता है बड़े तालाब का जलभराव
  3. आइसर और मैनिट के विज्ञानियों ने एआई से तैयार किया मॉडल

अंजली राय, नईदुनिया, भोपाल। सदियों से भोपाल की पहचान से जुड़ा बड़ा तालाब शहर की जीवनरेखा है। यह अब भी 40 प्रतिशत शहरियों की प्यास बुझा रहा है। इसकी अथाह जलराशि देखकर अंदाजा नहीं मिलता लेकिन एक खतरा इसकी ओर बेहद धीमे कदमों से बढ़ रहा है। यह खतरा इतना गंभीर है कि अगले 24 वर्षों में यानी वर्ष 2050 के प्री-मानसून सीजन तक तालाब का जलभराव क्षेत्र 40 से 60 प्रतिशत तक घट सकता है।

आइसर और मैनिट के विज्ञानियों का अध्ययन

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइसर) भोपाल और मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) के विज्ञानी बड़े जलस्रोतों पर वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं। आइसर के पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के डॉ. सोमिल स्वर्णकार के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम रिमोट सेंसिंग तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से इसका विश्लेषण कर रही है। इस टीम ने 1980 से 2024 तक के उपग्रह चित्रों और आंकड़ों की मदद से अगले 24-25 साल तक की परिस्थितियों का मॉडल विकसित किया है।


तापमान में 2 डिग्री वृद्धि से गंभीर असर, मई-जून में सबसे ज्यादा दिखेगा प्रभाव

इस अध्ययन में सामने आया कि वर्ष 1990 में अलग-अलग मौसम में भोजताल का जलभराव क्षेत्र लगभग 30 से 35 वर्ग किलोमीटर तक पहुंचता था। 2022 तक जलभराव क्षेत्र में मौसमी उतार-चढ़ाव का व्यापक असर दर्ज हुआ। इस बीच कई वर्ष ऐसे आए जब बरसात से पहले तालाब का जलभराव क्षेत्र एकदम से घट गया। 1990 में तो जलभराव क्षेत्र पांच वर्ग किमी तक कम हुआ था। विज्ञानियों का कहना है कि अगर वैश्विक तापमान में दो डिग्री सेल्सियस की भी वृद्धि होती है तो इस तालाब का जलभराव क्षेत्र 40 प्रतिशत तक हो जाएगा। इसका सबसे अधिक असर मई-जून के महीनों में दिखेगा।

मॉडल की सटीकता 90 प्रतिशत

विज्ञानियों ने शोध में फीडफॉरवर्ड न्यूरल नेटवर्क (एफएनएन) और लॉन्ग शॉर्ट-टर्म मेमोरी (एलएसटीएम) जैसी आधुनिक एआई तकनीक का उपयोग किया है। यह मॉडल 90 प्रतिशत सटीकता के साथ भविष्य का अनुमान लगाने में सफल रहा। इससे आने वाले वर्षों में जल संसाधनों की बेहतर योजना और संरक्षण में मदद मिल सकेगी।

दशकवार तापमान वृद्धि

इस मॉडल के मुताबिक 2000-2009 का दशक भोपाल में सबसे गर्म रहा। तब न्यूनतम तापमान 0.42 डिग्री, औसत 0.40 डिग्री और अधिकतम तापमान 0.37 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। 2010-2019 में भी तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा। हालांकि 2020 के बाद के वर्षों में कुछ गिरावट दर्ज हुई है।

हर दशक में ऐसे सिकुड़ा तालाब

1990 से 1999 के बीच औसत जलस्तर 20.67 वर्ग किमी रहा, जो 41 प्रतिशत कम है। 2000-2009 में घटकर 18.39 वर्ग किमी पहुंच गया, जो 47.5 प्रतिशत कम रहा। 2010-2019 में इसमें कुछ सुधार होकर औसत 19.44 वर्ग किमी पहुंचा, लेकिन जलस्तर में अस्थिरता लगातार बनी रही।

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तालाब सिकुड़ा तो यह होगा

  • पीने के पानी की कमी
  • मछलियों और पक्षियों पर असर
  • पानी की गुणवत्ता खराब होगी
  • भूजल स्तर गिरेगा
  • पर्यटन पर खराब असर पड़ेगा
  • आसपास का तापमान बढ़ जाएगा