
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। आयुष्मान भारत योजना के तहत नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स (एनएबीएच) मान्यता प्राप्त अस्पतालों की संख्या के मामले में मध्य प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बाद अब मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 285 अस्पताल एनएबीएच प्रमाणित हैं। प्रदेश में कुल 1926 सरकारी और निजी अस्पतालों में से इन अस्पतालों को यह गुणवत्ता प्रमाण पत्र मिला है, जो मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज की गारंटी देता है।
हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने निजी अस्पतालों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एनएबीएच प्रमाणीकरण को अनिवार्य न करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने साफ कहा कि मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह प्रमाणन जरूरी है। इसके बाद उम्मीद की जा रही है कि अब प्रदेश के अन्य अस्पताल भी मान्यता लेने के लिए आगे आएंगे।
एनएबीएच (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स) क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के अंतर्गत कार्य करता है। यह अस्पतालों, क्लीनिकों और हेल्थ केयर सेंटरों को गुणवत्ता मानकों के आधार पर प्रमाणन देता है। इसका उद्देश्य मरीजों को सुरक्षित, विश्वसनीय और मानक उपचार उपलब्ध कराना है।
एनएबीएच प्रमाणन तीन स्तरों में दिया जाता है इंट्री लेवल, प्रोग्रेसिव लेवल और फाइनल लेवल। अस्पताल को इन स्तरों पर संक्रमण नियंत्रण, मरीज सुरक्षा, स्टाफ की योग्यता, आपातकालीन सेवाएं, दवाओं का सुरक्षित उपयोग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मानकों पर खरा उतरना होता है। हर स्तर पर निरीक्षण के बाद ही अगला प्रमाणन दिया जाता है।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद बड़े शहरों जैसे भोपाल और इंदौर में योजना से जुड़ने वाले नए अस्पतालों के लिए एनएबीएच अनिवार्य कर दिया गया है। पहले से जुड़े अस्पतालों को भी छह माह के भीतर प्रमाणीकरण कराने का निर्देश दिया गया है। हालांकि कुछ अस्पताल संचालक इसका विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इसके लिए भवन संरचना, ऑपरेशन थिएटर, बेड दूरी और स्टाफ व्यवस्था जैसे मानकों पर निवेश करना पड़ता है।