
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सालों से स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों की योग्यता परखने की तैयारी लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने तेज कर दी है। हालांकि पुराने शिक्षकों को नए उम्मीदवारों के साथ परीक्षा नहीं देनी पड़ेगी, उनके लिए पात्रता परीक्षा अलग से आयोजित की जाएगी। मगर व्यापमं की परीक्षाओं के जरिए 17 साल पहले तक भर्ती किए गए शिक्षकों ने डीपीआई को उलझन में डाल दिया है। कोई रास्ता न मिलने पर विभाग को फिर विधि विशेषज्ञों से राय लेना पड़ रही है।
शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सितंबर 2025 में आदेश देने के बाद डीपीआई ने परीक्षा का कार्यक्रम भी जारी कर दिया था। इसके मुताबिक जुलाई-अगस्त में पहली परीक्षा रखी गई थी, लेकिन अब पुराने शिक्षकों को इससे राहत मिलती दिख रही है। अधिकारियों ने बताया कि जुलाई-अगस्त में नए उम्मीदवारों के लिए ही परीक्षा होगी। इसमें पुराने शिक्षकों को शामिल होने की जरूरत नहीं होगी। पुराने शिक्षकों के लिए विभाग अलग से परीक्षा तैयारी कराई जाएगी।
मप्र कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से साल में दोबारा परीक्षा कराएगा। साल में दो बार परीक्षाएं लेकर शिक्षकों की अगले तीन साल में पात्रता परखना है। विभाग द्वारा परीक्षा के पहले ऑनलाइन पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे तैयारी करने में शिक्षकों को सुविधा मिल जाएगी। फिर भी कोई शिक्षक यदि पहली बार में पास नहीं हो पाते हैं तो उसे आगे भी मौके मिलते रहेंगे।
व्यापमं द्वारा वर्ष 2005 से 2009 के बीच तीनों वर्गों के शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा आयोजित की गई थी। इन पात्रता परीक्षा के मिले प्राप्तांक और बोनस आदि अंकों के आधार पर विभाग ने शिक्षकों की भर्ती की थी। अब विभाग के सामने इन शिक्षकों को लेकर बड़ा कानूनी सवाल खड़ा हो गया है कि एक बार पात्रता परीक्षा दे चुके शिक्षकों की दोबारा टीईटी लेना न्यायोचित है या नहीं। इस मामले में विधि विशेषज्ञों से कानूनी राय मांगी है। विशेषज्ञों की राय मिलने के बाद ही इन शिक्षकों के लिए परीक्षा कराने के बारे में विचार किया जाएगा।
यह भी पढ़ें- बिन मां बाप की बेटी नहीं जुटा पाई दहेज, वरमाला के बाद बारात लेकर लौट गया दूल्हा, दुल्हन बोली- अब इंसाफ चाहिए
मप्र शिक्षक संघ का कहना है कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर बाद में बने नियम लागू करना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि यह न्याय और कानूनी निश्चितता के सिद्धांतों के भी विपरीत है। वहीं अध्यापक संयुक्त मोर्चा द्वारा पांच सितंबर शिक्षक दिवस पर दिल्ली में आंदोलन की तैयारी है।