
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: अक्सर देखा जाता है कि जब किसी मरीज को तेज बुखार के साथ दौरे पड़ते हैं या वह बेहोश होने लगता है, तो डॉक्टर इसे दिमागी बुखार (एन्सेफलाइटिस) मानकर इलाज शुरू करते हैं। कई बार तमाम जांचों के बावजूद बीमारी की सही वजह का पता नहीं चल पाता, जिससे इलाज में देरी होती है और मरीज की जान पर बन आती है।
अब एम्स भोपाल के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी खोज की है जो चिकित्सा जगत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। शोध में खुलासा हुआ है कि एक साधारण सा वायरस, जिसे 'पार्वोवायरस बी19' कहा जाता है, कुछ लोगों के दिमाग में गंभीर सूजन और संक्रमण पैदा कर सकता है।
एम्स भोपाल के विशेषज्ञों ने पिछले 30 वर्षों में दुनिया भर में हुई 14 अंतरराष्ट्रीय स्टडीज और 3,000 से अधिक मरीजों के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण किया। इस रिसर्च में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि हर 100 में से लगभग तीन एन्सेफलाइटिस मरीजों में इस वायरस का संक्रमण मौजूद था। हालांकि यह संख्या कम लग सकती है, लेकिन जब दिमागी बुखार का कारण स्पष्ट न हो, तब इस वायरस की पहचान मरीज को मौत के मुंह से बाहर ला सकती है।
पार्वोवायरस बी19 एक ऐसा आम वायरस है जिससे अधिकांश लोग अपने जीवन में कभी न कभी संपर्क में आते हैं, लेकिन आमतौर पर यह गंभीर नुकसान नहीं पहुंचाता। शोध के अनुसार, यह वायरस विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और उन लोगों के लिए खतरनाक है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। दिमाग में पहुंचते ही यह सूजन पैदा करता है, जिससे तेज बुखार, सिरदर्द, भ्रम की स्थिति और दौरे आने लगते हैं। यदि समय पर सही पहचान न हो, तो यह दिमाग को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाली एम्स की वैज्ञानिक डॉ. मेघा के. पांडे और न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रो. अमित अग्रवाल ने बताया कि कई मामलों में एन्सेफलाइटिस की वजह अनजानी रह जाती है। अब इस शोध के बाद डाक्टर उन मरीजों में पार्वोवायरस बी19 की जांच पर भी विचार कर सकेंगे, जिनकी बीमारी का कारण पता नहीं चल रहा है। इससे न केवल इलाज बेहतर होगा, बल्कि अनावश्यक जांचों और अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती रहने के खर्च से भी बचा जा सकेगा।
पार्वोवायरस बी19 एक सामान्य मानवीय वायरस है, जिसे 'पांचवीं बीमारी' या 'गालों पर थप्पड़' के नाम से भी जाना जाता है। यह मुख्य रूप से बच्चों के गालों पर चटक लाल चकत्ते, हल्का बुखार और वयस्कों में जोड़ों में दर्द पैदा करता है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलता है। सामान्यतः स्वस्थ लोग इससे जल्द ठीक हो जाते हैं, लेकिन दुर्लभ मामलों में यह वायरस दिमाग तक पहुंचकर गंभीर सूजन (एन्सेफलाइटिस) का कारण बन सकता है। फिलहाल इसका कोई टीका नहीं है।
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यह महत्वपूर्ण शोध एक बड़ी टीम के सहयोग से संपन्न हुआ, जिसमें डॉ. कश्मी शर्मा, डॉ. रोहन श्रीवास्तव, डॉ. सोमेश मिश्रा सहित बरकतुल्ला विश्वविद्यालय, (नीरे) और निहसाद के वैज्ञानिक भी शामिल रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में अब एन्सेफलाइटिस की जांच के लिए इस वायरस को भी मानक प्रोटोकाल में शामिल किया जाना चाहिए। बीमारी के लक्षण: इन्हें न करें नजरअंदाज अचानक बहुत तेज बुखार आना। असहनीय सिरदर्द और गर्दन में जकड़न। मानसिक भ्रम, चीजें भूलना या व्यवहार में बदलाव। दौरे पड़ना या अचानक बेहोश हो जाना। शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना।