
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। स्थानीय मौसमी तंत्र की सक्रियता से मानसून पूर्व हुई बारिश ने प्रदेश में नौतपा के आठवें दिन को ठंडा कर दिया। सोमवार को सतना, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, गुना जिलों में तेज बारिश हुई। कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हुई है। अधिकांश जिलों में हल्की बूंदाबांदी और अंधड़ चले हैं।
इस बीच दक्षिण पूर्व मानसून श्रीलंका क्षेत्र के आसपास से आगे नहीं बढ़ पाया है। इसके अगले दो दिनों में केरल पहुंचने की संभावना है। अब कहा जा रहा है कि प्रदेश में भी मानसून की दस्तक पूर्वअनुमानित समय 15 जून से पांच-सात दिन बाद यानी 20-22 जून तक ही हो पाएगी।
ज्योतिषीय मान्यता है कि सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में रहने के दौरान साल की सबसे भीषण गर्मी पड़ती है। लोक परंपरा में इसके शुरुआती नौ दिनों को नौतपा कहा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान अगर तेज गर्मी पड़े तो अच्छी वर्षा होती है। इसके उलट अगर इस दौरान लगातार बादल, आंधी या बारिश होती रहे तो वर्षा तरसा देती है। इस साल नौतपा की शुरुआत तो तीखी हुई लेकिन उसके बाद आंधी और बूंदाबांदी की घटनाएं होने लगी।
सोमवार को तो बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, गुना और शाजापुर जिलों समेत उनके आसपास के क्षेत्रों में तेज वर्षा के साथ ओलावृष्टि हुई। सतना में सबसे अधिक 22 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। बैतूल में भी 19 मिमी पानी गिरा है। दूसरे जिलों में भी बूंदाबांदी और अंधड़ का असर दिखा। भोपाल में शाम को 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली ठंडी हवाएं चलीं।
देवास, आगर मालवा, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, बैतूल, गुना, नीमच, मंदसौर, उज्जैन, हरदा, छिंदवाड़ा, पांढुर्ना, श्योपुर, मुरैना और शिवपुरी जिलों में 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली। वहीं इंदौर, रतलाम, भोपाल, खंडवा, नर्मदापुरम, रायसेन, विदिशा, सिवनी, मंडला, डिंडोरी, अनूपपुर, ग्वालियर, दतिया, सागर और दमोह जिलों में 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। इसकी वजह से प्रदेश के अधिकांश स्थानों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से कम हो गया।
मौसम विज्ञानी एचएस पांडेय ने बताया कि एक जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल तट पर पहुंचने का अनुमान था। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती सिस्टम और प्रशांत महासागर में सक्रिय हो रहे अलनीनो के कारण मानसूनी हवाओं की रफ्तार धीमी पड़ गई है। अगले दो-तीन दिनों में इसके केरल पहुंचने की संभावना है। इस देरी की वजह से उसके मध्यप्रदेश तक पहुंचने में पांच-सात दिनों का विलंब हो सकता है। अब 15 जून की बजाय यह 20-22 जून के आसपास प्रदेश में दाखिल होगा।
वर्तमान में मध्य प्रदेश के आसपास कई प्रेरित चक्रवात बने हुए हैं, जिसके चलते अगले चार दिनों तक मौसम ऐसा ही रहेगा। पूर्वी विदर्भ एवं उससे सटे छत्तीसगढ़ के ऊपर स्थित ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण अब दक्षिण-पूर्व मध्य प्रदेश एवं उसके आसपास के क्षेत्र पर सक्रिय है, जो समुद्र तल से 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक विस्तृत है।
राजगढ़ और आगर मालवा जिलों के लिए ओलावृष्टि व वज्रपात का आरेंज अलर्ट है। वहीं बड़वानी और धार जिलों में भी तेज झंझावात का आरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यहां 50-60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, अलीराजपुर, झाबुआ, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, अनूपपुर, डिंडोरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पांढुर्णा जिलों में झंझावात, बिजली चमकने और तेज हवाओं का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
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| शहर (City) | अधिकतम तापमान (°C) | न्यूनतम तापमान (°C) |
| भोपाल | 37.6 | 27.1 |
| इंदौर | 38.1 | 26.4 |
| ग्वालियर | 35.9 | 24.7 |
| जबलपुर | 38.6 | 24.7 |
नोट -- तापमान डिग्री सेल्सियस में