• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • दतिया उपचुनाव
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • ए आई बूटकैंप
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

मध्य प्रदेश में 37 लाख स्टूडेंट्स की नहीं बन पाई 'अपार ID', 30% छात्र डिजिटल पहचान से दूर; छोटे जिलों ने मारी बाजी

मध्य प्रदेश में 37 लाख छात्रों की 'अपार ID' अभी भी पेंडिंग है। भोपाल-इंदौर जैसे बड़े शहरों को पछाड़कर डिंडौरी और बालाघाट जिलों ने रजिस्ट्रेशन में बाजी...और पढ़ें

By Anjali raiEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Sun, 02 Aug 2026 08:09:07 AM (IST)Updated Date: Sun, 02 Aug 2026 11:49:15 AM (IST)
मध्य प्रदेश में 37 लाख स्टूडेंट्स की नहीं बन पाई 'अपार ID', 30% छात्र डिजिटल पहचान से दूर; छोटे जिलों ने मारी बाजी
मध्य प्रदेश के स्कूलों में छात्रों की 'अपार ID' बनाने के लिए शिविर भी आयोजित किए गए थे। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. MP में 1.40 करोड़ में से केवल 1.03 करोड़ स्टूडेंट्स की ही 'अपार ID' बन पाई है
  2. बड़े महानगर जैसे भोपाल और इंदौर रजिस्ट्रेशन में पीछे, जबकि बालाघाट आगे है
  3. APAAR ID में सभी एजुकेशन जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहती है

डिजिटस डेस्क, भोपाल। स्टूडेंट्स के एजुकेशनल रिकॉर्ड को डिजिटल, सुरक्षित और एक मंच पर लाने के लिए केंद्र सरकार ने 'वन नेशन, वन स्टूडेंट ID' पहल की शुरुआत की है। इसके तहत चलाई जा रही 'अपार ID' (APAAR ID) योजना मध्य प्रदेश में सुस्त रफ्तार से चल रही है। स्थिति यह है कि प्रदेश के कुल 1.40 करोड़ स्टूडेंट्स में से अब तक सिर्फ 1.03 करोड़ बच्चों का ही रेजिस्ट्रेशन हो पाया है, जबकि करीब 37 लाख विद्यार्थी (लगभग 30%) अभी भी इस डिजिटल पहचान से कोसों दूर हैं।

इस अभियान की खास बात यह रही कि भोपाल और इंदौर जैसे बड़े महानगर पिछड़ गए, जबकि डिंडौरी, मंडला और उज्जैन जैसे छोटे जिलों ने शानदार प्रदर्शन दिया है।

क्या है 'अपार ID' और इसके फायदे?

केंद्र सरकार की इस योजना के तहत प्रत्येक छात्र को 12 अंकों की एक विशिष्ट डिजिटल पहचान दी जाती है। इसके जरिए:

  • मार्कशीट, एडमिट कार्ड, डिग्रियां और पुरस्कार जैसी सभी एजुकेशन जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहती हैं।
  • छात्रवृत्ति (Scholarship), स्कूल एंट्रेंस एग्जाम और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में यह ID बेहद मददगार साबित होती है।

रेजिस्ट्रेशन में क्यों आ रही है दिक्कत?

हर शनिवार स्कूलों में 'मेगा अपार दिवस' आयोजित करने के निर्देश के बावजूद लक्ष्य पूरा न होने के पीछे कुछ मुख्य तकनीकी और व्यावहारिक परेशानियां सामने आई हैं-

  • आधार कार्ड से जुड़ी विसंगतियां और नाम में अशुद्धियां।
  • अभिभावकों से समय पर सहमति (Consent) न मिल पाना।

इन समस्याओं से निपटने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष प्रबंध किए हैं। ताकि आधार सुधार और तकनीकी अड़चनों को प्राथमिकता से दूर किया जा सके।

बड़े शहर पिछड़े, छोटे जिलों ने दिखाई लीड

आंकड़ों के मुताबिक, बड़े शहरों में बच्चों का रेजिस्ट्रेशन कम है-

कमजोर प्रदर्शन वाले शहर- भोपाल में 66.9%, ग्वालियर में 68%, जबकि इंदौर और जबलपुर में 72-73% स्टूडेंट्स की ही अपार ID बन पाई है।

टॉप 10 बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले जिले

  • डिंडौरी: 91.4%
  • बालाघाट: 90.1%
  • उज्जैन: 89.8%
  • मंडला: 86.7%
  • पांढुरणा: 84.6%
  • सिवनी: 82.5%
  • छिंदवाड़ा: 82.4%
  • बड़वानी: 82.2%
  • खंडवा: 80.07%
  • राजगढ़: 79.1%

सबसे पीछे रहने वाले 10 जिले

  • विदिशा: 63.6%
  • रायसेन: 63.9%
  • श्योपुर: 64.3%
  • देवास: 64.8%
  • झाबुआ: 65.3%
  • खरगोन: 65.6%
  • सागर: 66.6%
  • भोपाल: 66.9%
  • धार: 68.4%
  • मऊगंज: 68.9%

यह भी पढ़ें- एमपी के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 3,600 MBBS इंटर्न्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, जूडा ने भी दी आंदोलन की चेतावनी