
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र (MP Assembly Special Session 2026) सोमवार को आयोजित किया गया, जिसमें संसद और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण (Women Reservation) देने के मुद्दे पर चर्चा की गई।
विशेष सत्र से पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आवास पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि मध्य प्रदेश कांग्रेस विधानसभा में प्रस्ताव लाकर प्रदेश की 230 सीटों पर महिलाओं को 33% आरक्षण देने की मांग रखेगी।
सत्र के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं विधानसभा पहुंचीं और दर्शक दीर्घा में बैठकर कार्यवाही देखी। सदन की कार्यवाही ‘वंदे मातरम’ से शुरू हुई।
भाजपा को बेनकाब करने के लिए कांग्रेस तैयार है ✊
हमारी स्पष्ट मांग है :
लोकसभा की 543 सीटों और मप्र विधानसभा की 230 सीटों पर महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाए। pic.twitter.com/EfTTvA7h8H
— MP Congress (@INCMP) April 27, 2026
निधन उल्लेख के बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई थी। अब फिर से कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
मध्य प्रदेश विधानसभा में महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस के अशासकीय संकल्प पर लंबी बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष ने मांग रखी कि महिला आरक्षण को परिसीमन का इंतजार किए बिना, लोकसभा की वर्तमान सदस्य संख्या के आधार पर तत्काल लागू किया जाए।
संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि एक ही विषय पर दो संकल्प लेने की परंपरा नहीं है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने भी सहमति जताते हुए कांग्रेस के अशासकीय संकल्प को अस्वीकार कर दिया। हालांकि, सरकार द्वारा लाए गए शासकीय संकल्प में संशोधन शामिल कर चर्चा कराने की अनुमति दी गई। इसके विरोध में कांग्रेस के सभी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।
मंत्री कृष्णा गौर ने कांग्रेस पर महिलाओं के अपमान का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘नारी शक्ति वंदना अधिनियम’ लाया गया, लेकिन कांग्रेस ने इसका विरोध किया। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा प्रस्तुत संकल्प का समर्थन कर अपनी गलती सुधारे।
विपक्ष की विधायक झूमा सोलंकी ने भाजपा की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार गंभीर होती, तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा अधिसूचित कानून को लागू करने में देरी नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर जनगणना और परिसीमन को मुद्दा बनाकर आरक्षण टाल रही है।
कांग्रेस ने दावा किया कि महिलाओं को आरक्षण देने की पहल पहले भी की गई थी। राजीव गांधी के समय पंचायत राज में आरक्षण लागू हुआ, जबकि डॉ मनमोहन सिंह सरकार में महिला आरक्षण बिल राज्यसभा से पारित हुआ था।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने संकल्प का समर्थन करते हुए कहा कि पार्टी लगातार महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए काम कर रही है और वर्तमान योजनाएं इसका प्रमाण हैं।