
नवदुनिया राज्य ब्यूरो, भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद डा. मोहन यादव और उनके परिवारजनों ने बड़ी मात्रा में उज्जैन और उसके आसपास भूमि खरीदने का आरोप लगाया। बड़ी-बड़ी अधोसंरचना परियोजनाएं इन भूमियों के आसपास आईं। मुख्यमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या योजना पहले आई या जमीन पहले खरीदी गईं। जो कंपनियां रियल एस्टेट कि उनके परिवारजनों द्वारा खरीदी गई उसका ब्यौरा सार्वजनिक किया जाएगा।
मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज भोपाल में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के परिवार और रिश्तेदारों पर 335 एकड़ जमीन खरीदने का आरोप लगाया। एक मीडिया रिपोर्ट का हवाल देते हुए उन्होंने कहा कि साल 2021 और 2025 के बीच यह जमीन उज्जैन के महत्पूर्ण लोकेशंस पर खरीदी गई है।
जीतू पटवारी ने कहा कि नितेश यादव ने 108 एकड़, गोविंद यादव ने 47 एकड़, मोहन यादव ने 17 एकड़, सीमा यादव ने 11 एकड़, पुत्र वधू शालिनी यादव ने 10 एकड़ और साली रेखा यादव ने भी जमीन खरीदी। इनके नाम चार रियल एस्टेट कंपनियां है, इनमें बहुमत हिस्सेदारी सीमा यादव और मोहन यादव की है। सिद्धिविनायक बिल्डकॉन, अन्नपूर्णा कंस्ट्रक्शन इनमें शामिल हैं। बड़ी परियोजनाओं के पास के पास इनकी जमीनों से लगी हुई है।
ग्रीनफील्ड हाईवे सहित अन्य परियोजनाएं मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवारजनों की भूमि के आसपास ही है। यह तब हुआ जब मोहन यादव मुख्यमंत्री रहे। जीतू पटवारी ने कहा कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं प्रश्न कांफ्रेंस है। इस एक मामले से पूरा प्रदेश शर्मसार हुआ है। मुख्यमंत्री को मध्य प्रदेश को देश-विदेश को बताना चाहिए दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री बनने के बाद आपके परिवार और उससे जुड़ी कंपनियों ने 168 एकड़ भूमि अर्जित की या नहीं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी ने कहा कि 111 एकड़ जमीन ऐसी जगह पर खरीदी गए जो निर्माण परियोजना से प्रभावित क्षेत्र हैं। क्या यह संयोग है या फिर प्रयोग। जमीन खरीदो परियोजना लेकर आओ। भूमि उपयोग परिवर्तन की सूची सार्वजनिक करेगी। इन स्थानों की सरकार खरीदी गई तब भूमि का उपयोग क्या था और अब क्या है। उन्होंने सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जज से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी या नहीं।
कांग्रेस नेता पटवारी ने कहा कि 2 वर्षों में 168 एकड़ नई भूमि सीएम डॉ. मोहन यादव के परिवार ने जोड़ी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने आप को अलग किया है। क्या किसी कैबिनेट की बैठक, विभाग बैठक, मास्टर प्लान की प्रक्रिया में अपने परिवार के निजी लाभ को लेकर कोई चर्चा की है क्या। क्या मंत्रिमंडल में कभी यह बात आई।
यदि किसी मंत्री को किसी परियोजना का लाभ मिलता है तो क्या खुफिया तंत्र इस पर नजर रखता है, क्या कुछ बोलता है या चुप रहता है। परिवार जनों के साथ चार रियल एस्टेट कंपनियों का उल्लेख है। क्या सरकार इन कंपनियों के विवरण सार्वजनिक करेगी। क्या पत्नी की जो प्रॉपर्टी है वह किसी अन्य सदस्यों को हस्तांतरित किए गए हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि हाउसिंग प्रोजेक्ट और बिल्डिंग प्रोजेक्ट प्रारंभ हो गए। क्या यह पहले से रणनीति का हिस्सा था। रियल एस्टेट कंपनियों से एग्रीमेंट करेंगे और 10 रुपये की जमीन हजार रुपए की करेंगे। लैंड पूलिंग में 70% डेवलपमेंट भूखंड मिलेगा, जबकि सारी जगह 50 से प्रतिशत ही दिया जाता है तो क्या यह भूमि स्वामी के साथ धोखा नहीं है।
उन्होंने सवाल किया की प्रोजेक्ट में जो आर्थिक लाभ हो सकते हैं क्या उसे सरकार सार्वजनिक करेंगे। पहले जमीन खरीदी और फिर प्लान आया, इसका खुलासा पहले होना चाहिए। 2023 के बाद जितनी भी भूमि खरीदी गई उसकी सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जज से जांच कराई जाए। पहले योजना बनी या फिर जमीन पहले खरीदी गई यह मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि अभी और पहला मामला सामने आया है। ऐसे कई और प्रकरण एक के बाद एक सामने आएंगे। इंदौर-उज्जैन मार्ग फोरलेन की बात हुई किसने वहां जमीन खरीदी। 25000 करोड रुपए की जमीन आज एक सवाल लाख करोड रुपए की है।
भोपाल बाईपास भी बन रहा है यहां भी जमीन का खेल हुआ है। उज्जैन में नियम बदल दिए गए इंदौर का मास्टर प्लान आज तक नहीं बन पाया। जमीन की हेराफेरी हो रही है। कौन सी कंपनी है कर रही है कौन सी मुख्यमंत्री से जुड़ी है, क्या वे इसके बारे में अपना स्पष्टीकरण देंगे।
2023 में इंदौर विकास योजना की अधिसूचना जारी हुई। सिद्धि विनायक, मंगल मूर्ति, अन्नपूर्णा इंटरप्राइजेज सहित अन्य कंपनियों ने जमीन खरीदी। 6 महीने में रजिस्ट्री में बदली, यह बड़ा जमीन घोटाला है। नवंबर 2025 में जो गांव के लोग हमारे पास आए थे। एक जमीन मालिका जिसका निधन हो गया था दूसरे व्यक्ति को उसे बनाकर निलेश यादव ने जमीन की रजिस्ट्री करा ली। 2 करोड़ रुपये की जमीन है। लोगों को प्रताड़ित कर जमीनों की रजिस्ट्रियां कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री कहेंगे कि हमारा परिवार इनकम टैक्स भरता है। क्या मुख्यमंत्री आरोपों पर जवाब देंगे प्रदेश की जनता को बताएंगे की वास्तविक स्थिति क्या है। सिंहस्थ के नाम पर पूरे उज्जैन के क्षेत्र में बड़ा भ्रष्टाचार हो रहा है। मुख्यमंत्री के ऊपर आरोप लगे हैं तो उन्हें नैतिकता के आधार पर स्वत ही इस्तीफा दे देना चाहिए।