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भोपाल मेट्रो के रास्ते में आई नए मुसीबत, 1959 के राजस्व रिकॉर्ड में नया खुलासा; मुआवजे और जमीन रिकॉर्ड को लेकर बढ़ा विवाद

भोपाल मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण में आ रही 32 आरा मशीनों की शिफ्टिंग जमीन विवाद में फंस गई है।

By Madanmohan malviyaEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sun, 21 Jun 2026 09:49:26 PM (IST)Updated Date: Sun, 21 Jun 2026 09:49:26 PM (IST)
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भोपाल मेट्रो के रास्ते में आई नए मुसीबत, 1959 के राजस्व रिकॉर्ड में नया खुलासा; मुआवजे और जमीन रिकॉर्ड को लेकर बढ़ा विवाद
जमीन स्वामित्व विवाद से शिफ्टिंग प्रक्रिया हुई प्रभावित (AI Generated Image)

HighLights

  1. मेट्रो एलाइन्मेंट में आ रहीं 32 आरा मशीनें
  2. प्रशासन ने मुआवजा देने से किया इनकार
  3. टिंबर कारोबारियों ने दस्तावेज होने का दावा

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण के लिए प्रस्तावित आरा मशीनों की शिफ्टिंग अब जमीन के स्वामित्व विवाद में उलझ गई है। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिन जमीनों पर वर्षों से आरा मशीनें संचालित हो रही हैं, वे राजस्व रिकॉर्ड में वर्ष 1959 से म्युनिसिपल बोर्ड के नाम दर्ज हैं। प्रशासन का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज भूमि के लिए मुआवजा नहीं दिया जा सकता। वहीं टिंबर कारोबारियों का दावा है कि उनके पास जमीन के मालिकाना हक से जुड़े वैध दस्तावेज मौजूद हैं।

मेट्रो एलाइन्मेंट की जद में 32 आरा मशीनें

भोपाल मेट्रो के दूसरे चरण के निर्माण के दौरान 32 आरा मशीनें एलाइन्मेंट की सीमा में आ रही हैं। इन इकाइयों को छोटा रातीबड़ स्थित नए टिंबर क्लस्टर में स्थानांतरित किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए मेट्रो रेल कंपनी की ओर से छह करोड़ रुपए जमा कराए जा चुके हैं। उद्योग विभाग द्वारा विकसित किए जा रहे इस क्लस्टर में आरा मशीन संचालकों को नए प्लाट आवंटित किए जाएंगे।


शिफ्टिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद सामने आ गया है। भू-अर्जन जांच के दौरान प्रशासन को रिकॉर्ड में जमीन म्युनिसिपल बोर्ड के नाम दर्ज होने की जानकारी मिली।

प्रशासन और कारोबारियों के दावों में अंतर

राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह भूमि सरकारी संपत्ति है, इसलिए इसके लिए मुआवजा देना संभव नहीं है। दूसरी ओर टिंबर मार्केट एसोसिएशन ने प्रशासन के इस दावे को चुनौती दी है। कारोबारियों का कहना है कि उनके पास जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज हैं और यदि सरकार अपने निर्णय पर कायम रहती है तो वे इस मामले को सिविल कोर्ट में ले जाएंगे। इससे शिफ्टिंग प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।

140 आरा मशीनों का होना है विस्थापन

पूरे जिले में करीब 140 आरा मशीनों के विस्थापन की योजना प्रस्तावित है। हालांकि फिलहाल मेट्रो एलाइन्मेंट में केवल 32 इकाइयां ही प्रभावित हो रही हैं। इस पूरे मामले में दो अलग-अलग मुद्दे सामने हैं। पहला मुद्दा आरा मशीन संचालकों के पुनर्वास का है, जिसके लिए छोटा रातीबड़ में टिंबर क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। दूसरा और बड़ा मुद्दा उस जमीन का स्वामित्व है, जिस पर वर्तमान में ये इकाइयां संचालित हो रही हैं।

मेट्रो निर्माण कार्य फिलहाल जारी

जमीन विवाद के बावजूद मेट्रो निर्माण कार्य प्रभावित नहीं हुआ है। अंडरग्राउंड टनल के निर्माण के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) लगभग 70 मीटर आगे बढ़ चुकी है और खोदाई का काम जारी है।

आरा मशीन संचालकों ने भी मेट्रो कार्य में बाधा न आए, इसके लिए निर्माण क्षेत्र से पीछे हटना शुरू कर दिया है। अब विवाद का मुख्य केंद्र मेट्रो निर्माण नहीं, बल्कि जमीन का मालिकाना हक और मुआवजे का मुद्दा बन गया है। मेट्रो परियोजना से प्रभावित 32 आरा मशीनों के विस्थापन और भूमि स्वामित्व का मामला अलग-अलग है। प्रभावित इकाइयों को उद्योग विभाग द्वारा छोटा रातीबड़ स्थित टिंबर क्लस्टर में प्लाट आवंटित किए जाएंगे।राजस्व रिकार्ड में संबंधित भूमि शासकीय दर्ज पाई गई है, इसलिए भू-अर्जन के तहत जमीन का मुआवजा नहीं दिया जा सकता है।

-दीपक पांडे, एसडीएम, शहर वृत्त

कारोबारियों के पास जमीन के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज हैं। यदि मुआवजा रोका गया तो अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा। विवादित भूमि के एवज में करीब 30 करोड़ रुपये के मुआवजे का मामला जुड़ा हुआ है।

-बदर-ए-आलम, अध्यक्ष, टिंबर मार्केट एसोसिएशन