
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में आठवीं तक के 55 लाख से अधिक बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार करने वाले रसोइयों के भुगतान में गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। पीएम पोषण पोर्टल के माध्यम से भुगतान की व्यवस्था है। इसकी समीक्षा में रसोइयों के नाम और पते तो सही मिले लेकिन बैंक खाते दूसरे के दर्ज हैं। यानी काम कोई कर रहा है और भुगतान किसी और को किया जा रहा है। एक रसोइए का पंजीयन अलग-अलग स्कूल में होने की बात भी प्रतिवेदन में है।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव संजय गोयल ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और प्रधानाध्यापकों को रसोइयों का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। गड़बड़ी प्रमाणित होने पर प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों को 20 जुलाई तक जांच रिपोर्ट ऑनलाइन देनी होगी।
सभी रसोइयों का ई-केवाईसी व समग्र आईडी सत्यापन कराया जाएगा। उनके आधार नंबर से लिंक बैंक खातों का भी मिलान करना है। पोर्टल पर सही जानकारी अपडेट होने के बाद ही मानदेय दिया जाएगा। यदि किसी स्कूल में निर्धारित संख्या से अधिक रसोइए पंजीकृत पाए जाते हैं तो उनका भुगतान नहीं किया जाएगा। अतिरिक्त मानदेय की पूरी जिम्मेदारी संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी को खुद वहन करनी होगी। विकासखंड स्तर पर विकासखंड समन्वयक भी रिकॉर्ड का सत्यापन करवाएंगे।
मध्याह्न भोजन की निगरानी के लिए एजुकेशन पोर्टल की लॉगिन आईडी को पीएम पोषण पोर्टल से जोड़ा गया है। स्कूल के प्रधानाध्यापक आधिकारिक यूजर आईडी से लॉगिन करेंगे। विकासखंड समन्वयक के लिए भी विशेष पंजीकृत लॉगिन आईडी अनिवार्य है।
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