MP Police Promotion: 1269 अधिकारियों की पदोन्नति पर सवाल, राज्य पुलिस सेवा संघ ने CM मोहन यादव से मुलाकात कर रखीं मांगें
राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात कर पदोन्नति में तेजी, रिक्त आइपीएस पदों पर अवसर और नियमित कैडर रिव्यू...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 21 Aug 2026 09:38:02 PM (IST)Updated Date: Fri, 21 Aug 2026 09:38:02 PM (IST)
राज्य पुलिस सेवा संघ ने CM मोहन यादव से मुलाकात कर मांगें रखीं। (फाइल फोटो)HighLights
- रिक्त आइपीएस पदों पर एक साथ पदोन्नति का अवसर मांगा।
- अधिकारियों ने छोटे जिलों में वरिष्ठ एसपी बनाने सुझाव दिया।
- नियमित काडर रिव्यू कराने की मांग भी प्रमुख रही।
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। पदोन्नति में गति लाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव से उनके आवास पर भेंट की।
एक साथ पदोन्नति का अवसर देने की मांग
- इस दौरान अधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में आइपीएस के जितने भी रिक्त पद हैं, उन पर राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को एक साथ एक बार पदोन्नति का अवसर दिया जाए तो समस्या काफी हद तक हल हो सकती है।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कई राज्यों में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी 14 से 15 वर्ष में पदोन्नत होकर आइपीएस बन जा रहे हैं। यहां तक कि छत्तीसगढ़ में भी वर्ष 2004 का बैच पदोन्नत हो चुका है, जबकि मध्य प्रदेश में अभी 1998 बैच के अधिकारी पदोन्नत हुए हैं। छोटे जिलों में पुलिस अधीक्षक बनाने का सुझाव
- यह भी सुझाव दिया है कि यदि पदोन्नति नहीं हो पा रही है तो छोटे जिलों में राज्य पुलिस सेवा के ही वरिष्ठ अधिकारियों को पुलिस अधीक्षक के तौर पर पदस्थ किया जा सकता है।
- लगभग 20 वर्ष पहले प्रदेश में यह व्यवस्था चल भी रही थी, जिसे बाद में बंद कर दिया गया। इसके अतिरिक्त यह भी सुझाव दिया है कि कई विभागों में ऐसे पद हैं, जहां राज्य पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किया जा सकता है।
नियमित काडर रिव्यू पर जोर
अधिकारियों ने यह मांग भी रखी है कि काडर रिव्यू नियमित तौर पर होना चाहिए। ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि किस राज्य में किस बैच के अधिकारी पदोन्नत होकर आइपीएस बन चुके हैं, जबकि मध्य प्रदेश की क्या स्थिति है। प्रदेश में राज्य पुलिस सेवा के 1269 अधिकारी हैं, लेकिन पदोन्नति में देरी के कारण कई अधिकारी आइपीएस बने बिना ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं।