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राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में मध्य प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। विधेयक का प्रारूप तय करने वाली समिति को व्यक्तिगत श्रेणी में 9.5 लाख से अधिक सुझाव ऑनलाइन मिले हैं। इनमें 93 प्रतिशत ने यूसीसी का समर्थन किया है।
मुस्लिम समुदाय का कितना समर्थन मिलेगा
यूसीसी को मुस्लिम समुदाय का कितना समर्थन मिलेगा, इसे लेकर संशय की स्थिति थी। यह माना जा रहा था कि यह वर्ग साथ नहीं आएगा, लेकिन प्रदेश में तस्वीर कुछ अलग ही उभरकर सामने आई है। 44 हजार मुस्लिमों ने यूसीसी को लेकर सुझाव दिए हैं। इनमें से 21,500 यानी करीब 49 प्रतिशत ने इसका समर्थन किया है। तीन तलाक की कुप्रथा को समाप्त करने के लिए जिस तरह भारत सरकार के कानून को समर्थन मिला, ठीक वैसा ही यूसीसी के मामले में मध्य प्रदेश में भी हुआ है।
इस वर्ग की महिलाएं पुरुषों से काफी आगे हैं
यूसीसी को समर्थन के मामले में इस वर्ग की महिलाएं पुरुषों से काफी आगे हैं। सुझाव देने वाली 71 प्रतिशत मुस्लिम महिलाएं चाहती हैं कि यूसीसी लागू हो। वहीं, 38 प्रतिशत पुरुष इसके समर्थन में हैं। यानी इस वर्ग से जो थोड़ा-बहुत विरोध नजर आ रहा है, वह उनकी तरफ से है जो पुरातन व्यवस्था को बनाए रखना चाहते हैं।
आमजन से 12 प्रश्नों पर सुझाव मांगे थे
20 जुलाई से प्रारंभ होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक प्रस्तुत करने की तैयारी है। इसका प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने आमजन से 12 प्रश्नों पर सुझाव मांगे थे। सुझाव देने वालों में 42 प्रतिशत पुरुष, 58 प्रतिशत महिलाएं और 100 से अधिक उभयलिंगी शामिल हैं। चार लाख महिलाओं में से 3.8 लाख यानी 95 प्रतिशत और साढ़े पांच लाख पुरुषों में से 5.1 लाख यानी 92 प्रतिशत ने सुझाव दिया कि यूसीसी को लागू किया जाए।
मुस्लिम महिलाओं ने इसका समर्थन किया
यह अनुमान सभी को था कि हिंदू पक्ष इसका पूर्ण समर्थन करेगा। यह सही भी साबित हुआ। समिति के सदस्यों को प्रदेश के मुस्लिम वर्ग के सुझावों ने जरूर चौंकाया। उम्मीद से बढ़कर मुस्लिम महिलाओं ने इसका समर्थन किया। बता दें, पिछले दिनों भोपाल की प्रशासन अकादमी में हुई राज्य स्तरीय सुनवाई में कुछ मुस्लिम संगठनों से जुड़े व्यक्तियों ने स्पष्ट कहा था कि हमारा समुदाय इसे स्वीकार नहीं करेगा। वह इसका विरोध करेंगे। मगर जो राय सामने आई है, वह स्पष्ट संकेत है कि समुदाय का बड़ा हिस्सा रूढ़िवादी विचारों का समर्थन नहीं करता है और परिवर्तन के पक्ष में है। बता दें, उत्तराखंड, गुजरात और असम में यूसीसी लागू हो चुका है।