
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। प्रदेश के लिए बड़ी चिंता की बात है कि वर्ष 2024 में राज्य सड़क दुर्घटनाओं की सर्वाधिक संख्या के मामले में तमिलनाडु के बाद दूसरे स्थान पर है। मध्य प्रदेश में 55,711 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जबकि तमिलनाडु में 67,526 हुईं। इतना ही नहीं सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र के बाद चौथे स्थान पर है। यहाँ 16,831 लोगों की मृत्यु हुई। यह जानकारी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की हाल में जारी 2024 की रिपोर्ट के अनुसार है।
प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। हेलमेट और सीट बेल्ट न लगाना यहाँ होने वाली मौतों के सबसे बड़े कारणों में से एक है। वर्ष 2024 में मध्य प्रदेश में सड़क हादसों में 16,831 लोगों की मौत हुई। इनमें से लगभग 53 प्रतिशत लोग दोपहिया वाहन सवार थे।
राज्य में दोपहिया वाहन सवारों की होने वाली इन मौतों में से 75 प्रतिशत मामले ऐसे थे जहाँ चालक या सवार ने हेलमेट नहीं पहना था, यानी हर चार में से तीन बिना हेलमेट वाले चालक थे। राजधानी भोपाल में भी सड़क हादसों में वृद्धि देखी गई है। शहर के कुछ क्षेत्रों (जैसे टीटी नगर और बैरागढ़) को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है, जहाँ 2024 में मौतों के आंकड़ों में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।
ये आंकड़े भी डराते हैं कि मध्य प्रदेश में तेज गति की वजह से 31,554 घटनाएं हुईं, जिसमें 8,429 लोगों की जान गई। रोड इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से 126 घटनाएं हुईं, जिसमें 15 लोगों की जान गई। प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों में हुई सड़क दुर्घटनाओं में 4,711 लोगों की जान गई जो इन सड़कों में देश में कुल मृत्यु के मामलों का 7.7 प्रतिशत है। स्टेट हाईवे में 3425 की मृत्यु के मामले सामने आए। शराब पीकर वाहन चलाने की वजह से देश में जितने लोगों की मृत्यु हुई, उनमें सर्वाधिक 13 प्रतिशत मध्य प्रदेश के थे। प्रदेश में प्रति लाख 52 लोग दुर्घटना का शिकार हुए।
प्रदेश में वर्ष 2024 में दुर्घटनाओं में (यातायात हादसों के अतिरिक्त) 45,695 लोगों की जान चली गई, जो देश का 9.8 प्रतिशत है। बिजली गिरने से 430 पुरुष और 147 महिलाओं की मृत्यु हुई जो देश में सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसके बाद बिहार में 360 की जान गई। करंट लगने की 1,492 घटनाएं हुईं जो उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद सर्वाधिक है। इसमें 1,495 लोगों की मौत हुई। बिजली गिरने और लू के कारण प्रदेश में 1,085 लोगों की जान चली गई। ओडिशा (1,494) के बाद इस कारण से सर्वाधिक लोगों की मृत्यु मध्य प्रदेश में हुई है।
अचानक (सडन डेथ) 4,092 लोगों की मृत्यु वर्ष 2024 में हुई। इसमें 2,115 लोगों की मौत हार्ट अटैक से हुई। स्ट्रक्चर गिरने की प्रदेश में 177 घटनाएं हुईं। महाराष्ट्र में 215 के बाद यह दूसरी बड़ी संख्या है। इससे प्रदेश में 179 लोगों की मृत्यु हुई। पुल ढहने की देश में 30 घटनाएं हुईं, उनमें मध्य प्रदेश की पांच हैं और पांच लोगों की इसमें मौत हुई है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा बाल अपराधों को लेकर जारी किए गए आंकड़े प्रदेश के अभिभावकों को डराने और चेताने वाले हैं। क्राइम इन इंडिया 2024 रिपोर्ट के अनुसार, 18 वर्ष से कम आयु के बालक-बालिकाओं द्वारा 3,474 अपराध किए गए, जो बिहार (5,037) और महाराष्ट्र (3,779) के बाद किसी राज्य की तीसरी बड़ी संख्या है। इनमें 4,109 आरोपित हैं। इनमें 260 मामले दुष्कर्म के हैं जो देश में सर्वाधिक हैं।
इसी तरह से खुदकुशी के लिए उकसाने के 22 मामले किशोरों के विरुद्ध दर्ज किए गए हैं, यह भी देश में सबसे बड़ी संख्या है। हत्या के 101 मामले हैं। संगठित अपराध में शामिल होने के 12 मामले सामने आए हैं, यह भी किसी राज्य की सबसे बड़ी संख्या है। हालांकि, वर्ष 2022 और 2023 की तुलना में 2024 में बाल अपराधों में कमी आई है।