
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। लोगों को साइबर अपराधों से सतर्क रहने की सलाह देने वाली पुलिस भी अब ऑनलाइन ठगों के जाल से अछूती नहीं रही है। राजधानी में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस कंट्रोल रूम में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक को साइबर ठग ने सुनियोजित तरीके से अपने झांसे में लेकर 1.63 लाख रुपये की चपत लगा दी। आरोपित ने खुद को सीआरपीएफ का जवान बताते हुए पुलिसकर्मी के बचपन के जिगरी दोस्त का परिचित बताया और सस्ते दाम पर फर्नीचर बेचने का ऐसा जाल बुना कि अनुभवी पुलिसकर्मी भी उसकी बातों पर भरोसा कर बैठे।
गोविंदपुरा थाना पुलिस के अनुसार 43 वर्षीय दिलीप कुमार मध्यप्रदेश पुलिस में प्रधान आरक्षक हैं और वर्तमान में पुलिस कंट्रोल रूम में पदस्थ हैं। वह पुलिस लाइन गोविंदपुरा में परिवार के साथ रहते हैं। नौ जून को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से काॅल आया। काॅल करने वाले ने स्वयं को सीआरपीएफ का जवान बताया और कहा कि वह उनके बचपन के मित्र योगेश आठनेरे का परिचित है। बातचीत के दौरान उसने बताया कि उसका जल्द ही दूसरे शहर में स्थानांतरण होने वाला है, इसलिए वह अपना घरेलू फर्नीचर कम कीमत पर बेचना चाहता है।
ठग ने सोफा सेट, डाइनिंग टेबल और अन्य घरेलू सामान की तस्वीरें भेजीं। साथ ही यह भी कहा कि योगेश ने बताया था कि दिलीप कुमार को फर्नीचर की आवश्यकता है। परिचित का नाम सामने आने और तस्वीरें देखने के बाद पुलिसकर्मी को पूरी बात विश्वसनीय लगी। आरोपित ने पूरे फर्नीचर की कीमत 80 हजार रुपये बताई और सौदा पक्का करने के लिए 10 हजार रुपये एडवांस मांगे। दिलीप ने बिना देर किए राशि ट्रांसफर कर दी।
इसके बाद आरोपित ने अलग-अलग बहाने बनाकर रकम मांगना शुरू कर दिया। पहले शेष 70 हजार रुपये लिए गए। फिर सेना की ट्रांसपोर्ट लाइन और एंट्री प्रक्रिया का हवाला देकर 41 हजार 500 रुपये जमा कराए गए। इतना ही नहीं, ठग ने यह कहकर एक और राशि ट्रांसफर करा ली कि भुगतान गलत तरीके से किया गया है। उसे 41 हजार रुपये अलग और फिर 500 रुपये दूसरी किस्त में भेजना था। लगातार बढ़ती मांगों के बावजूद पुलिसकर्मी को ठगी का अंदेशा नहीं हुआ और दोबारा से रकम ट्रांसफर कर दी।