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वैभव श्रीधर, भोपाल। प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2027-28 का बजट बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। नौ सितंबर से विभागवार बैठकें शुरू होंगी। बजट को तैयार करने में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो, इसके लिए तीन स्तर पर परखने के बाद ही प्रारूप तैयार किया जाएगा। दरअसल, आय का अनुमान गड़बड़ाने से पूरा वित्त प्रबंधन गड़बड़ा जाता है। विभागों के बजट में कटौती करनी पड़ती है, जिसका असर निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति पर पड़ता है।
यह बात किसी एक वर्ष की नहीं बल्कि प्रतिवर्ष ऐसी स्थिति बन रही है। इसे लेकर नियंत्रक महालेखापरीक्षक (कैग) भी आपत्ति जता चुका है। इसे देखते हुए पहले चरण में अपर सचिव और उपसचिव विभागों के बजट प्रस्तावों का परीक्षण करेंगे। दूसरे चरण में सचिव और तीसरे चरण में मंत्रियों के साथ बैठक करके बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रदेश में 2023-24 के बजट से 16 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2024-25 का अनुमानित बजट 3,65,067 करोड़ रुपये प्रस्तुत किया गया था।
जब इसे पुनरीक्षित किया गया, तो वास्तविक राशि 3,55,886 करोड़ रुपये रही। इसी आधार पर 2025-26 में 4,21,032 करोड़ रुपये का बजट अनुमान विधानसभा में प्रस्तुत किया गया, मगर यह अनुमान भी गड़बड़ा गया। जब 2026-27 के बजट के साथ बीत रहे वित्तीय वर्ष का पुनरीक्षित बजट सामने रखा गया तो यह घटकर 3,95,021 रह गया यानी 65,146 करोड़ रुपये का अंतर आया। यह किसी एक वर्ष की बात नहीं है। लगभग यही स्थिति हर वर्ष बन रही है।
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इसके मायने यह हुए कि विभागों द्वारा आय-व्यय का जो अनुमान लगाया जा रहा है, वह वास्तविकता के नजदीक नहीं है। इससे पूरी बजट प्रक्रिया पर भी सवाल उठते हैं। कैग भी 2025 में विधानसभा में प्रस्तुत रिपोर्ट में यह बात उठा चुका है।
2023-24 के राज्य वित्त पर दिए प्रतिवेदन में बजट अनुमान, अनुपूरक बजट अनुमान को लेकर सवाल उठाए गए। आंकड़ों के आधार पर यह बताया गया कि विभागों द्वारा जो अनुमान लगाए गए, उसमें 67,926 करोड़ रुपये की बचत हुई। 57,983 करोड़ रुपये के अनुपूरक प्रविधानों में से 29,098 अनुपयोगी रहे।