
नवदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन बनाने का आदेश महानिरीक्षक पंजीयन कार्यालय ने नवंबर 2025 में जारी किया था। जिसके अनुसार 30 जनवरी तक प्रस्ताव तैयार कर सुझावों पर सुनवाई की जानी थी और 15 फरवरी तक केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है।
इसका नतीजा यह होगा कि इस बार भी लोगों के पास अपने सुझाव पेश करने का समय नहीं रहेगा और मनमानी प्रॉपर्टी की दरें बढ़ा दी जाएंगी।
इस वित्तीय वर्ष में भी प्रस्ताव बनाने में अधिकारियों ने लेटलतीफी बरती थी और लोग अपने सुझाव दर्ज नहीं करवा पाए थे।जब जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज करवाई तो प्रॉपर्टी की प्रस्तावित दरों में कटौती कर प्रस्ताव को लागू किया गया था।
महानिरीक्षक पंजीनय कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव उप जिला मूल्यांकन समिति को संपदा सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार कर 15 जनवरी को जिला मूल्यांकन समिति को भेज देना था।
जिसको लेकर जिला मूल्यांकन समिति द्वारा 30 जनवरी तक लोगों के सुझावों को प्राप्त कर सुनवाई की जानी थी, लेकिन तीन महीने का समय बीत गया और न ही प्रस्ताव तैयार हुआ है और न ही लोगों को इसकी जानकारी दी गई है।
ऐसे में 15 फरवरी तक केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को प्रस्ताव भेजना असंभव है और अब अधिकारी आनन-फानन में प्रस्ताव तैयार करने में जुटे हुए हैं। जिससे आशंका जताई जा रही है कि प्रॉपर्टी की दरों में मनमानी वृद्धि की जाएगी, जिससे आमनज को प्रॉपर्टी खरीदना मुश्किल हो जाएगा।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बनाई गई कलेक्टर गाइडलाइन में अधिकारियों ने 18 प्रतिशत तक औसत वृद्धि प्रस्तावित कर दी थी, जिसका जमकर विरोध शुरू हो गया था। इसके बाद इसमें चार प्रतिशत की कटौती कर 14 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा गया था।
इससे बोर्ड ने गाइडलाइन दरों में औसत 11 प्रतिशत वृद्धि तय की थी। इसके बाद भी कई क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि प्रस्तावित कर दी गई थी। जिले की तीन हजार 883 में से एक हजार 312 स्थानों पर दरें बढ़ाई गइ थीं।
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नई कलेक्टर गाइडलाइन के प्रस्ताव पर काम किया जा रहा है, जल्द ही बैठक में चर्चा के बाद प्रस्ताव जिला मूल्यांकन समिति को भेज दिया जाएगा।
- विनोद सोनकिया, अध्यक्ष, उप जिला मूल्यांकन समिति