

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। पशुपालन एवं डेयरी विभाग में पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञों की प्रथम श्रेणी के पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संस्था (सपाक्स) ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से शिकायत कर पदोन्नति प्रक्रिया की जांच और नियमों के पालन का परीक्षण कराने की मांग की है। संस्था का आरोप है कि 2025 के लोक सेवा पदोन्नति नियमों के अनुरूप विचार क्षेत्र और आरक्षित पदों की गणना नहीं की गई।
सपाक्स के अध्यक्ष केपीएस तोमर के अनुसार, 2025 के पदोन्नति नियम की कंडिका 11(4) में रिक्त पदों के आधार पर संयुक्त विचारण सूची तैयार करने का प्रविधान है। विभाग में प्रथम श्रेणी के 186 पदों पर पदोन्नति होनी थी। नियम में निर्धारित फार्मूले के अनुसार उपलब्ध रिक्तियों की संख्या के दो गुना में चार जोड़ने पर 376 अधिकारी विचार क्षेत्र में आने चाहिए थे।
आरोप है कि विभाग ने इसके बजाय वरिष्ठता सूची में 543वें क्रम तक के अधिकारियों को भी विचार क्षेत्र में शामिल कर लिया। इससे पदोन्नति के लिए तैयार की गई संयुक्त वरिष्ठता सूची को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सूची में वर्ष 1998 में भर्ती हुए अधिकारियों के साथ 2011 में भर्ती हुए अधिकारियों को भी शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई गई है।
पदोन्नति प्रक्रिया में भारतीय पशु चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डा. उमेश कुमार शर्मा भी कारण बताओ नोटिस के आधार पर 30 अधिकारियों को प्रक्रिया से बाहर रखने का विषय उठा चुके हैं। अब सपाक्स ने इस पूरे मामले में नियमों की जांच कराने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि पदोन्नति प्रक्रिया में विचारण क्षेत्र निर्धारित करने से लेकर आरक्षित और अनारक्षित पदों की गणना तक नियमों का पालन किया जाना जरूरी है। इसी आधार पर 27 जुलाई 2026 को हुई विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक और उसके बाद जारी आदेश की समीक्षा की मांग की गई है।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग की डीपीसी की बैठक 27 जुलाई 2026 को हुई थी। इसके आधार पर 13 अगस्त को पदोन्नति आदेश जारी किए गए। इन आदेशों के माध्यम से पशु चिकित्सा अधिकारियों को उप संचालक, पशु प्रजनन कार्यक्रम अधिकारी और सिविल सर्जन जैसे प्रथम श्रेणी के पदों पर पदोन्नत किया गया।
सपाक्स का आरोप है कि अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित पदों का निर्धारण एक्स-वाय के आकलन के आधार पर होना था। इसके लिए भरे हुए पदों की वास्तविक स्थिति को आधार बनाया जाना चाहिए था, जबकि विभाग ने स्वीकृत पदों के आधार पर गणना की।
सपाक्स ने मांग की है कि 27 जुलाई की डीपीसी की अनुशंसाओं और 13 अगस्त को जारी पदोन्नति आदेशों की समीक्षा की जाए। साथ ही संयुक्त वरिष्ठता सूची दोबारा तैयार कर विचारण क्षेत्र का पुनर्निर्धारण करने और आरक्षित व अनारक्षित पदों की गणना की फिर से जांच करने की मांग की गई है।
उधर, विभाग के संचालक पीएस पटेल ने कहा कि पदोन्नति से संबंधित सभी पत्राचार को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार प्रक्रिया पूरी की गई है। उनके अनुसार सभी स्तर से अनुमोदन मिलने के बाद पदोन्नति आदेश जारी किए जा चुके हैं और संबंधित अधिकारियों ने अपने दायित्व भी संभाल लिए हैं।