
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सहायक ग्रेड तीन पद पर पदोन्नति रुक गई है। विभागों में सीपीसीटी (कंप्यूटर प्रवीणता एवं प्रमाणन परीक्षा) की अनिवार्यता का हवाला देकर पात्र कर्मचारियों की पदोन्नतियां रोक रहे हैं। कई मामलों में पहले जारी किए गए पदोन्नति आदेश भी निरस्त कर कर्मचारियों को दोबारा चतुर्थ श्रेणी के पद पर भेज दिया गया है।
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पत्र लिखकर मांग की है कि दो वर्ष की परिवीक्षा पर बिना सीपीसीटी सहायक ग्रेड तीन के पद पर पदोन्नति दी जाए।
संगठन के प्रांतीय महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने बताया कि पदोन्नति नियम 2025 के आधार पर जून 2026 में विभागों ने पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की। कई विभागों ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को दो वर्ष की परिवीक्षा पर सहायक ग्रेड तीन के पद पर पदोन्नत भी किया, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग के 26 मार्च 2026 के स्पष्टीकरण और 22 जुलाई 2026 को उच्च शिक्षा विभाग को भेजे गए पत्र के बाद स्थिति बदल गईं।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन में जारी पदोन्नति आदेश निरस्त करने के निर्देश दिए गए, जबकि उद्योग विभाग में भी 14 कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित होने का दावा किया गया है। सीपीसीटी की अनिवार्यता सीधी भर्ती के लिए लागू की गई थी, जबकि इसे पदोन्नति का आधार बनाना उचित नहीं है। अनुकंपा नियुक्ति या चतुर्थ श्रेणी में नियुक्त कर्मचारी वर्षों बाद पदोन्नति के पात्र बनते हैं। ऐसे में सीपीसीटी की शर्त और प्रमाण-पत्र की सात वर्ष की वैधता उन्हें पदोन्नति से वंचित कर रही है।
संगठन ने सरकार से मांग की है कि सीपीसीटी के आधार पर निरस्त किए गए सभी पदोन्नति आदेश बहाल किए जाएं। साथ ही सेवा अवधि और आवश्यक शैक्षणिक योग्यता पूरी करने वाले सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को बिना सीपीसीटी की बाध्यता के दो वर्ष की परिवीक्षा पर सहायक ग्रेड तीन में पदोन्नति दी जाए।